रामदास बाबू के निधन से कोल्हान में झामुमो का सबसे मजबूत स्तम्भ ढहा
दोपहर में मऊभंडार में हज़ारों समर्थक करेंगे अंतिम दर्शन
आज शाम घोड़ाबाँधा में होगा अंतिम संस्कार
घाटशिला l संवाददाता
रामदास सोरेन का जन्म 1 जनवरी 1963 को पूर्वी सिंहभूम जिले के घोड़ाबांधा (टेल्को) में हुआ था। मुलरूप से उनका गाँव घाटशिला प्रखंड का खरसती है l रामदास सोरेन घोड़ाबाँधा के प्रधान भी रहे हैँ l
गुरु जी शिबू सोरेन के संपर्क और झारखंड मुक्ति मोर्चा की राजनीति में आने के बाद दिनोदिन राजनितिक रूप से परिपक्व होते गए और पार्टी में ओहदा भी बढ़ते रहा l ग्राम प्रधान से होते हुए पार्टी के विधानसभा क्षेत्र स्तरीय अध्यक्ष बनाये गए l तीन बार विधायक और दो दफा मंत्री बने l पार्टी के संस्थापक दिशोंम गुरु शिबू सोरेन और बाद में हेमंत सोरेन का भरोसा इनपर शुरू से बरकरार रहा l

इसका परिणाम रहा कि गुरु जी के अध्यक्ष रहते और बाद में पार्टी कि कमान हेमंत सोरेन के हाथों में आने के बाद भी रामदास सोरेन को पार्टी ने घाटशिला विधानसभा सीट से वर्ष 2009 से 2014 के चुनाव तक अपना प्रत्याशी बनाया l वर्ष 2004 में पहली दफा रामदास ने घाटशिला से चुनाव जरूर लदे थे, किन्तु निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर l वह चुनाव झामुमो ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके लड़ा था और तब यह सीट कांग्रेस के तत्कालीन प्रेध अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू के हिस्से में आई थी l बावजूद इसके रामदास ने पार्टी लाइन से अलग हटकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे l तब इनका चुनाव चिन्ह टोकरी था और लगभग 35 हज़ार वोट लाकर इन्होंने विजयी प्रत्याशी प्रदीप बलमुचू के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए भाजपा समेत सारे दलीय – निर्दलीय उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया था l

रामदास सोरेन 2009 में घाटशिला से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनने में कामयाब हुए l
लेकिन 2014 में वे भाजपा के लक्ष्मण टुडू से हार गए l 2019 में भाजपा को पटकनी देकर वापसी करते हुए दोबारा जीत दर्ज की। 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बाबूलाल सोरेन को हराकर वे तीसरी बार घाटशिला सीट पर विधायक बने l
पिछली सरकार के कार्यकाल के अंतिम महीनों में राजनितिक उथल- पुथल हुई थी l
पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन के इस्तीफे के बाद 30 अगस्त 2024 को रामदास सोरेन को कैबिनेट मंत्री के रूप में हेमंत सोरेन सरकार में शामिल किया गया और उच्च शिक्षा मंत्री सहित कुछ अन्य विभाग मिला l
ख़ासकर संथाल समाज में रामदास सोरेन काफ़ी लोकप्रिय थे l मंत्री बनने के बाद
उन्होंने हमेशा आदिवासी अधिकारों, शिक्षा और समाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।ब्याहन तक कि asam के आदिवासियों को उनका अधिकार दिलवाने के लिए हस्तक्षेप करने से भी पीछे नहीं हटे l

रामदास सोरेन 2 अगस्त को जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास में बाथरूम में गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आई थीं। प्रारंभिक इलाज टाटा मोटर्स अस्पताल में हुआ, जिसके बाद उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती थे l
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। अपोलो बके अलावे मुंबई और बेंगलुरु से विशेषज्ञ बुये गया l इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रामदास बाबू के स्वास्थ्य को लेकर इस कदर चिंतित थे कि अस्पताल में शुरू के दिन से लेकर अंत तक पूर्व विधायक कुणाल सारंगी को को- ऑर्डिनेट करने कि ड्यूटी लगा दिया था l कुणाल ने को- ऑर्डिनेट करके रामदास सोरेन का हेल्थ रिपोर्ट अमेरिका के डॉक्टर्स तक भेजवाया l लेकिन ईश्वर को शायद यही मंजूर था l
रामदास सोरेन का अंतिम संस्कार आज शाम को घोड़ाबाँधा के पास परम्परा के अनुसार विधि – विधान से होगा l समाचार लिखें जाने तज उनकी शव यात्रा दिल्ली से रांची और उसके बाद घाटशिला के लिए निकल चुकी है l रांची से घाटशिला आने के क्रम में जगह- जगह उन्हें पार्टी कार्यकर्त्ता एवं समर्थक श्रद्धांजलि सभा की व्यवस्था किये हुए हैँ l घाटशिला के मऊभंडार मैदान में विधानसभा क्षेत्र स्तरीय शोक कार्यक्रम राजहंस गया है, जहां हज़ारों की संख्या में सामर्थको के साथ – साथ प्रशासन एवं आईसीसी कम्पनी के प्रतिनिधि अंतिम दर्शन करके श्रद्धांजलि अर्पित करेँगे l

