वक्फ विधेयक का उद्देश्य लोगों को धार्मिक आधार पर बांटना : कांग्रेस, आईयूएमएल, एलडीएफ
कांग्रेस, उसकी प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि वक्फ संशोधन विधेयक लोगों को धार्मिक आधार पर बांटने के संघ परिवार के एजेंडे का हिस्सा है। विधेयक के खिलाफ मतदान करने के कारण विभिन्न चर्च समूहों की आलोचना का सामना कर रही कांग्रेस और आईयूएमएल ने यह भी कहा कि यह विधेयक एर्णाकुलम जिले के मुनंबम गांव के लोगों के भूमि स्वामित्व के मुद्दे का समाधान नहीं करेगा।
साथ ही, दोनों दलों ने यह भी कहा कि मुनंबम मुद्दे का समाधान सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार द्वारा किया जा सकता है, बशर्ते वह ऐसा चाहे। कांग्रेस ने राज्य में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पर भी हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ के लिए दो धार्मिक समूहों के बीच संघर्ष का कारण बने मुनंबम मुद्दे के समाधान में देरी कर रही है। वहीं, एलडीएफ ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन व वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने संसद में इस विधेयक पर बहस के दौरान इसके खिलाफ क्यों नहीं बोला।
लोकसभा में बृहस्पतिवार को वक्फ विधेयक पारित होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन ने कहा कि केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट कर दिया है कि विधेयक का ‘पूर्वव्यापी’ प्रभाव नहीं होगा। उन्होंने कोच्चि के निकट उत्तरी पारावुर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘तो क्या वे सभी लोग जो दावा कर रहे हैं कि विधेयक मुनंबम के लोगों की मदद करेगा, कृपया बताएंगे कि इससे वहां के प्रभावित लोगों को किस प्रकार लाभ होगा?’’
सतीशन ने विधेयक को ‘असंवैधानिक’ और एक विशेष धार्मिक समुदाय के अधिकारों को छीनने और उन्हें नुकसान पहुंचाने के संघ परिवार के एजेंडे का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि मुनंबम पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट है,‘‘यह वक्फ की जमीन नहीं है’’। सतीशन ने कहा, ‘‘यह भूमि दान में दी गई थी और इसके बदले में वर्तमान निवासियों ने धन भी स्वीकार किया था। इसलिए केरल सरकार और राज्य वक्फ बोर्ड को वहां के लोगों के लिए स्थायी स्वामित्व सुनिश्चित करना चाहिए।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने ईसाई समुदाय को भी अपने इस रुख से अवगत करा दिया है।’’
सतीशन ने आरोप लगाया कि संघ परिवार इस मुद्दे को दो धार्मिक समुदायों के बीच संघर्ष में बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश भर में ईसाइयों पर सबसे अधिक हमले हो रहे हैं और वह भी संघ परिवार की ओर से। सतीशन ने आरोप लगाया कि केरल में माकपा नेताओं की सोच संघ परिवार जैसी ही बुरी है और इसीलिए वे मुनंबम मुद्दे के समाधान में देरी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘राज्य वक्फ बोर्ड के सदस्यों की नियुक्तियां राजनीतिक हैं। उन्हें बस इतना कहना है कि यह वक्फ भूमि नहीं है, जैसा कि हमने कहा। इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा। केरल सरकार मुनंबम मुद्दे को न सुलझाकर संघ परिवार की गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।
एलडीएफ संयोजक टी पी रामकृष्णन ने तमिलनाडु के मदुरै में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी को संसद में इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि राहुल गांधी ने मतदान में हिस्सा लिया, लेकिन उन्होंने इस मामले में उस तरह से काम नहीं किया जैसा कि एक विपक्ष के नेता से अपेक्षित था।’’
रामकृष्णन ने कहा कि यहां तक कि प्रियंका गांधी ने भी वायनाड के लोगों का रुख बताने की अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई है, जिनका वह प्रतिनिधित्व करती हैं। एलडीएफ संयोजक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)सरकार पर ‘‘जानबूझकर अपनी विभाजनकारी रणनीति जारी रखने’’ का आरोप लगाया और कहा कि वक्फ विधेयक का उद्देश्य लोगों को धार्मिक आधार पर बांटना है।
विधेयक के बारे में इसी तरह के विचार साझा करते हुए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सुप्रीमो पनक्कड सैय्यद सादिक अली शिहाब थंगल ने कहा कि यह वक्फ संपत्तियों को हड़पने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि लीग मुनंबम के लोगों के साथ है और उन्हें बेदखल करने के पक्ष में नहीं है।
एर्नाकुलम जिले के मुनंबम गांव में निवासियों ने आरोप लगाया है कि वक्फ बोर्ड उनकी भूमि और संपत्ति पर अवैध रूप से दावा कर रहा है, जबकि लोगों के पास पंजीकृत दस्तावेज और भूमि कर भुगतान रसीदें हैं। आईयूएमएल विधायक एम के मुनीर ने भी सतीशन और थंगल के समान विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वक्फ विधेयक और मुनंबम के लोगों की समस्याएं दो अलग-अलग मुद्दे हैं।
मुनीर ने चेतावनी दी कि संशोधन लागू होने के बाद ‘‘स्थिति और भी बदतर हो जाएगी’’। वक्फ संशोधन विधेयक को बुधवार देर रात लोकसभा में 12 घंटे की बहस के बाद पारित कर दिया गया। विपक्ष द्वारा पेश किए गए सभी संशोधनों को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। लोकसभा ने इस विधेयक को 232 के मुकाबले 288 मतों के बहुमत से मंजूरी दी।