पोटका में जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर गरजे ग्रामीण, 15 दिन का अल्टीमेटम
राष्ट्र संवाद संवादाता
पोटका विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों में स्थानीय आदिवासी समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने और जल,जंगल,जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में पारंपरिक ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन के नेतृत्व में करीब 300 ग्रामीण पारंपरिक तीर-धनुष के साथ उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और स्थानीय लोगों की उपेक्षा,भूमि संबंधी मामलों तथा विकास योजनाओं में भागीदारी नहीं मिलने पर नाराजगी जताई।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पोटका विधानसभा क्षेत्र में बृहद जनसभा और महापंचायत आयोजित कर लोकतांत्रिक आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन के नेतृत्व में पोटका विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे करीब 300 ग्रामीणों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि पोटका क्षेत्र में संचालित कई विकास कार्यों में स्थानीय मांझी बाबा, ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि धुमकुड़िया भवन, रंकिनी मंदिर परिसर समेत विभिन्न निर्माण कार्यों में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट, पेसा कानून के अनुपालन,अवैध माइनिंग तथा जल, जंगल और जमीन पर बढ़ते खतरों को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
दुखनी सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और जल-जंगल-जमीन से है। विकास के नाम पर स्थानीय लोगों को दरकिनार करना स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि सभी विकास कार्यों में स्थानीय युवाओं, ग्रामीणों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों की भागीदारी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को 15 दिनों का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो पोटका विधानसभा क्षेत्र में बृहद जनसभा और महापंचायत आयोजित कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
दुखनी सोरेन ( आंदोलन नेतृत्वकर्ता )

