यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. जादूगोड़ा में फिर उजागर हुआ लाखों का घोटाला
*अब सवाल यह उठ रहा है कि:*
*घोटालों के आरोपी अधिकारी पर यूरेनियम कॉर्पोरेशन का प्रबंधन इतनी मेहरबानी क्यों कर रहा है?*
*इतने घोटाले उजागर होने के बाद भी जांच फाइलें दबाव में क्यों दब जाती हैं?*
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा:यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL), जादूगोड़ा में एक बार फिर लाखों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चूना आपूर्ति से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है। पहले चुना बोरे के साथ आपूर्ति किया जाता था, और उपयोग के बाद उन बोरों की नीलामी से यूरेनियम कॉर्पोरेशन को हर साल लाखों रुपये की आय होती थी।

लेकिन, परचेज विभाग के अधिकारी सुदीप्तो दास के कार्यकाल में निविदा शर्तों में बदलाव कर यह शर्त जोड़ दी गई कि खाली बोरे आपूर्तिकर्ता को वापस कर दिए जाएंगे। बताया जाता है कि इस संशोधन से आपूर्तिकर्ता को बोरों का पुनः उपयोग करने का रास्ता मिल गया और लाखों रुपये का लाभ पहुंचाया गया। बदले में भारी कमीशनखोरी का आरोप भी लग रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव से UCIL को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और कंपनी के खाते में आने वाली आय सीधे प्रभावित हुई।

इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि दास के कार्यकाल में सल्फ्यूरिक एसिड की आपूर्ति में भी लगभग 10 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था, जिसमें केंद्रीय सतर्कता विभाग (CVC) ने उन्हें दोषी पाया और कार्रवाई के आदेश दिए। बावजूद इसके, न केवल कार्रवाई ढीली रही बल्कि उन्हें फिर से परचेज विभाग में तैनात कर दिया गया, जिससे प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस बोरा घोटाले की यदि स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई और गड़बड़ियों का पर्दाफाश होगा। यह भी सामने आया है कि सीबीआई ने पहले ही सुदीप्तो दास के खिलाफ ‘मेजर पेनल्टी’ की सिफारिश की थी, लेकिन UCIL प्रबंधन ने अब तक इसे लागू नहीं किया।

अब सवाल यह उठ रहा है कि —
👉 घोटालों के आरोपी अधिकारी पर यूरेनियम कॉर्पोरेशन का प्रबंधन इतनी मेहरबानी क्यों कर रहा है?
👉 इतने घोटाले उजागर होने के बाद भी जांच फाइलें दबाव में क्यों दब जाती हैं?
स्थानीय लोग और कर्मचारी संगठन केंद्रीय जांच एजेंसियों की सीधी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि UCIL जादूगोड़ा में हो रहे करोड़ों के खेल का सच सामने आ सके।

