बिहार बंद के बाद सियासी संग्राम: सड़क की हिंसा से सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
राष्ट्र संवाद ब्यूरो अशोक ठाकुर
पटना:बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा और जेजेडी अध्यक्ष तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। सिवान में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प, पथराव, लाठीचार्ज और फायरिंग के आरोपों ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
सिवान में बिहार बंद के दौरान बड़ी संख्या में छात्र गांधी मैदान की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पहले नोकझोंक हुई, फिर पथराव शुरू हो गया। पुलिस का कहना है कि पथराव के बाद हल्का बल प्रयोग किया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर फायरिंग का आरोप लगाया है। एक युवक के गोली लगने से घायल होने का दावा भी सामने आया है। हालांकि गोली किसकी ओर से चली, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
इधर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मांग की है कि छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ्तार सभी छात्रों, नेताओं और प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही गोली चलाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। तेजस्वी ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो विपक्ष राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन करेगा।
दूसरी ओर सरकार और पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की गई है। तेजप्रताप यादव को भी हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
बिहार बंद के बाद अब मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष की अगली रणनीति पर पूरे राज्य की नजर रहेगी।

