“मानवतावादी और समग्र शिक्षा के लिए आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता : बदलते संदर्भ में भावी शिक्षकों की भूमिका ” इस विषय पर रंभा कॉलेज आफ एजुकेशन में आज आयोजित किया गया एक दिवसीय नेशनल सेमिनार
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कुल 28 पेपर प्रेजेंटेशन किये गए।
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रंभा कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में दिनांक 5 अप्रैल ,दिन शनिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का मूल विषय था “मानवतावादी और समग्र शिक्षा के लिए आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता: बदलते संदर्भ में भावी शिक्षकों की भूमिका।”
इस सेमिनार में झारखंड ,पश्चिम बंगाल और उड़ीसा से आए शिक्षाविद और गणमान्य लोगों ने भाग लिया ।
“की नोट स्पीकर” के रूप में भुवनेश्वर से डॉक्टर रमाकांत महालिक ,शिक्षा विभाग ,नोडल ऑफिसर ,एजुकेशनल टेक्नोलॉजी उपस्थित रहे। गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर सेमिनार में उपस्थित थी डाॅ विभा पांडे , डिप्टी डायरेक्टर सह स्टेट नोडल ऑफिसर, रूसा ,नैक,डिपार्टमेंट ऑफ हाईयर एंड टेक्निकल एजुकेशन, झारखंड।
विद्यार्थियों ने सेमिनार का आरंभ अतिथियों को तिलक लगाकर उनका अभिनंदन करते हुए किया ।
रंभा कॉलेज आफ एजुकेशन के विद्यार्थियों ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किया। सभी अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का औपचारिक उद्घाटन हुआ । छात्राओं ने दीप मंत्र का वाचन किया।सभी मंचासीन अतिथियों को पौधा ,उत्तरीय और प्रतीक चिन्ह देकर उनका अभिनंदन किया गया ।
कॉलेज के सचिव गौरव कुमार बचन ने स्वागत वक्तव्य दिया।
तत्पश्चात सचिव गौरव बचन द्वारा स्वरचित पुस्तक “द ब्लूप्रिंट ऑफ कॉलेज मैनेजमेंट” का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों के द्वारा किया गया। पुस्तक के विषय में बताते हुए श्री गौरव बचन जी ने कहा कि यह विचारों की यात्रा है और अनुभवों की एक ईमानदार साझेदारी है।
अध्यक्ष श्री राम बचन जी ने भी अपना आशीर्वचन दिया ।
बीज वक्तव्य देते हुए डॉ रमाकांत महालिक ने अपने वक्तव्य में कहा कि पंचकोश ज्ञान को जीवन में उतारने की आवश्यकता है तभी मूल्य आधारित शिक्षा आकार ले सकेगी।
पश्चिम बंगाल से आई व्याख्याता डॉ हरिप्रिया पांडा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि टीचर्स को अभिमन्यू पेडागोगी को समझना होगा।
कोल्हान विश्वविद्यालय , एम एड विभाग के डाॅ मनोज कुमार ने कहा कि आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता को शिक्षा से जोड़कर ही मानवीय मूल्यों का संरक्षण संभव है ।
कोल्हान विश्वविद्यालय , एम एड विभाग की विभागाध्यक्षा डाॅ सुचित्रा बेहरा ने कहा कि पहले स्वयं को जानें तब बाहरी जगत को समझ सकेंगे।
ग्रेजुएट कॉलेज की प्राचार्या डॉ वीणा सिंह प्रियदर्शी ने विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि शिक्षक की भूमिका भारतीय समाज में सत्यम शिवम सुंदरम की तरह है। हम सभी को अपनी गरिमा को बचाना है।
डिप्टी डायरेक्टर सह स्टेट नोडल ऑफिसर, रूसा ,नैक,डिपार्टमेंट ऑफ हाईयर एंड टेक्निकल एजुकेशन, झारखंड, डॉक्टर विभा पांडे जी ने अपने वक्तव्य में सभी को संबोधित करते हुए हमें यह बात बताई कि सेल्फ रियलाइजेशन जरूरी है ताकि हम इस इस बदलती दुनिया में कहां हैं, ये जान पायेंगे।
प्रथम सत्र में धन्यवाद ज्ञापन किया असिस्टेंट प्रोफेसर अमृता सुरेन ने ।
भोजनावकाश के बाद छात्राओं के द्वारा झारखंड लोक नृत्य की प्रस्तुति हुई। तत्पश्चात व्याख्यातागण और विद्यार्थियों के द्वारा पेपर प्रजेंट किया गया। यह राष्ट्रीय सेमिनार हाइब्रिड मोड में था ।
कुल 17 ऑफलाइन पेपर प्रस्तुत किए गए और 11 ऑनलाइन पेपर प्रस्तुत किए गए ।
प्रतिभागी व्याख्यातागणों और विद्यार्थियों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण भी किया गया। द्वितीय सत्र के पश्चात धन्यवाद ज्ञापन दिया आई क्यू ए सी इंचार्ज डॉक्टर गंगा भोला ने।
नेशनल सेमिनार का कुशल संचालन किया डॉ सुमन लता और असिस्टेंट प्रोफेसर ऐश्वर्या कर्मकार ने।
इस नेशनल सेमिनार में गोड्डा महिला महाविद्यालय के व्याख्याता बृजेश मिश्रा जी की भी उपस्थिति रही। विवेकानंद बी एड कॉलेज की प्राचार्या डॉक्टर शुभ्रा पालित ने भी अपना वक्तव्य दिया ।
टेक्निकल पक्ष का दायित्व निभाया असिस्टेंट प्रोफेसर सूरज कुमार और मुकेश मिश्रा ने। सेमिनार में अध्यक्षा रंभा देवी और सहसचिव विवेक बचन की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों को असिस्टेंट प्रोफेसर रश्मि लुगून, अमृता सुरेन, मंजू गगराई, संदीप सिंह और अजय कुमार यादव ने देखा। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ सतीश चंद्र ,डॉक्टर दिनेश यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर शीतल कुमारी, डॉक्टर किशन जोशी, कमला महतो,दीपाली मंडल ,रूपम वर्मा, कमलकांत , पिंकी पांडे , मुस्कान और राधे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सेमिनार में अध्यक्षा रंभा देवी , सहसचिव विवेक बचन और नर्सिंग, ए एन एम, जी एन एम और डिग्री विभाग के व्याख्यातागणों की
भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस नेशनल सेमिनार की कोऑर्डिनेटर रहीं प्रिसिंपल डाॅ कल्याणी कबीर।