नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले घाटशिला विधान सभा में मतदाताओ ने बैखौफ होकर सारे रिकार्ड को तोड़ा
घIटशिला। संवाददाता
कभी नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले घाटशिला विधान सभा में मतदाताओ ने बैखौफ होकर सारे रिकार्ड को तोड़ते हुए 72.16 प्रतिशत मतदान किया। छिटफूट घटना को छोड़ दे तो पुरे विधान सभा में संध्या पांच बजे तक मतदान हुआ। सबसे ज्यादा मतदान घाटशिला प्रखंड के झारखंड बंगाल सीमा पर अवस्थित सबसे नक्सल प्रभावित गांवों में कभी गिने जाने वाले झांटी झरना के तीन बुथो पर कुल 78 प्रतिशत मतदान कर लोगों ने यह बता दिया कि अब वह विकास के मार्ग पर अग्रसर है। घाटशिला विधान सभा के लगभग सभी बुथो पर सुबह से ही मतदाताओ को लंबी कतार शहर से लेकर गांवों तक में देखने को मिला। हालांकि सुबह 7 बजे से लेकर दिन के 11 बजे तक लंबी लंबी कतार देखने को मिली, उसके बाद पारा चढ़चे ही मतदान का प्रतिशत कम होते गया। लेकिन दिन के तीन बजे के बाद एक बार फिर मतदान ने रफ्तार पकड़ी और संध्या होते होते अबतक के सारे रिकार्ड को तोड़ते हुए आंकड़ा 72 प्रतिशत कर पहुंच गया। मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये थे और अधिकतर बूथो में बीएसएफ, आईआरबी,सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया था। हालांकि इस दौरान घाटशिला प्रखंड के बुथ संख्या-102 पर मतदान करने आये मुराकाटी गांव निवासी बुढ़ान हांसदा का लू लगने से मौत हो गयी। वही दूसरी ओर घालभूमगढ़ प्रखंड के उमवि छौड़िया में ग्रामीणों ने वोट का बहिष्कार किया, जिसके कारण इस बूथ पर मात्र एक ही वोट पड़ा। दूसरी ओर गुड़ाबांदा प्रखंड में मतदान कराने रिजर्व में गये युसील कर्मी जॉन मांझी की मौत ईलाज के क्रम में हो गयी।