नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब चिकित्सा क्षेत्र में बीमारी की पहचान करने के तरीके को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. माइक्रोसॉफ्ट के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा AI सिस्टम विकसित किया है, जो डॉक्टरों की तरह मरीज की स्थिति को चरणबद्ध तरीके से समझते हुए संभावित बीमारी का पता लगाने का प्रयास करता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, जटिल मेडिकल मामलों को हल करने में इस सिस्टम ने सामान्य चिकित्सकों की तुलना में दो गुने से भी अधिक सटीकता हासिल की. इस शोध के निष्कर्ष गुरुवार को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Science में प्रकाशित अध्ययन में सामने आए. इस तकनीक की खासियत यह है कि यह एक साथ उपलब्ध सभी जानकारियों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मरीज से जरूरी सवाल पूछने, जांचों का चयन करने और अलग-अलग संभावनाओं का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया अपनाती है. हालांकि, इन परिणामों का अर्थ यह नहीं है कि AI अब हर बीमारी का निदान डॉक्टरों से बेहतर कर सकता है या चिकित्सकों की जगह लेने के लिए पूरी तरह तैयार है.
डॉक्टरों की तरह चरणबद्ध तरीके से काम करेगा AI
आमतौर पर कई मौजूदा मेडिकल AI मॉडल को मरीज से जुड़ी जानकारी एक साथ दी जाती है और फिर उनसे संभावित बीमारी या निदान बताने के लिए कहा जाता है. इस तरीके में सिस्टम उपलब्ध विवरणों का विश्लेषण करके जवाब तैयार करता है.
माइक्रोसॉफ्ट के शोधकर्ताओं ने इससे अलग तरीका अपनाया है. उनका विकसित सिस्टम बीमारी की पहचान को एक क्रमिक प्रक्रिया के रूप में देखता है. इसमें पहले उपलब्ध जानकारी को समझा जाता है, फिर यह तय किया जाता है कि मरीज से कौन-से अतिरिक्त सवाल पूछने चाहिए और किन जांचों की आवश्यकता हो सकती है.
यह तरीका डॉक्टरों की सामान्य कार्यप्रणाली से मिलता-जुलता है. चिकित्सक भी मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण के आधार पर संभावित बीमारियों की सूची तैयार करते हैं. इसके बाद वे जरूरत के अनुसार जांच करवाते हैं और नए नतीजों के आधार पर अपने निष्कर्षों को संशोधित करते हैं.
AI में इसी तरह की प्रक्रिया विकसित करने का उद्देश्य केवल जवाब देना नहीं, बल्कि निदान तक पहुंचने के दौरान जानकारी जुटाने और उसका मूल्यांकन करने के चरणों को भी व्यवस्थित करना है.
Orchestrator करेगा पूरी प्रक्रिया का संचालन
इस AI सिस्टम की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका ‘ऑर्केस्ट्रेटर’ है. यह ऐसा समन्वयकारी सिस्टम है, जो तय करता है कि किसी मेडिकल समस्या को हल करने के लिए AI को किस क्रम में काम करना चाहिए.
शोध के विवरण के अनुसार, यह ऑर्केस्ट्रेटर विभिन्न क्लिनिकल विशेषज्ञों की भूमिका का अनुकरण करने वाले AI सिस्टमों के एक समूह के साथ काम करता है. ये सिस्टम किसी जटिल मामले के अलग-अलग पहलुओं का मूल्यांकन करने में सहयोग करते हैं.
उदाहरण के तौर पर, किसी मरीज में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जो एक से अधिक बीमारियों से जुड़े हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में सिस्टम को यह तय करना होता है कि कौन-सी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है, किन संभावनाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए और आगे कौन-से सवाल पूछने से निदान अधिक स्पष्ट हो सकता है.
ऑर्केस्ट्रेटर इस प्रक्रिया को व्यवस्थित करता है, ताकि सिस्टम उपलब्ध जानकारी के आधार पर अगले कदम का चयन कर सके. इस तरह AI केवल एक अनुमान प्रस्तुत करने के बजाय सवालों, संभावित जांचों और निष्कर्षों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास करता है.
हालांकि, AI विशेषज्ञों का अनुकरण करता है, इसका अर्थ यह नहीं है कि इसमें वास्तविक डॉक्टरों की एक टीम मरीज का परीक्षण कर रही होती है. यह तकनीक सॉफ्टवेयर आधारित विश्लेषण और समन्वय पर निर्भर करती है.
जटिल मेडिकल मामलों में सटीकता को लेकर बड़ा दावा
माइक्रोसॉफ्ट के शोधकर्ताओं के अनुसार, उनके AI सिस्टम ने जटिल चिकित्सा मामलों को हल करने में सामान्य चिकित्सकों की तुलना में दो गुने से अधिक सटीकता दिखाई.
यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जटिल मामलों में बीमारी की पहचान करना आसान नहीं होता. कई रोगों के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं. कुछ बीमारियां शुरुआती चरण में स्पष्ट संकेत नहीं देतीं, जबकि कुछ मामलों में मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, दवाओं और जांच के परिणामों को एक साथ समझना आवश्यक होता है.
ऐसी परिस्थितियों में सही सवाल पूछना और उचित जांच चुनना निदान की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है. चरणबद्ध तरीके से काम करने वाला AI सिस्टम इसी प्रक्रिया को बेहतर बनाने की संभावना प्रस्तुत करता है.
लेकिन अध्ययन में बताए गए परिणामों को समझने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि परीक्षण किन मामलों पर किया गया, चिकित्सकों की तुलना किस तरह की गई और सटीकता को मापने के लिए कौन-से मानक इस्तेमाल किए गए. उपलब्ध रिपोर्ट में इन सभी विवरणों का पूरा ब्योरा नहीं है. इसलिए इस निष्कर्ष को सभी प्रकार की बीमारियों और वास्तविक अस्पतालों में AI की श्रेष्ठता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए.
मेडिकल AI के पुराने तरीकों से कितना अलग है यह मॉडल
चिकित्सा क्षेत्र में AI का इस्तेमाल पहले से ही मेडिकल इमेज का विश्लेषण करने, संभावित रोगों की पहचान करने और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करने जैसे कामों में किया जा रहा है.
हालांकि, हर मेडिकल समस्या का समाधान केवल तस्वीरों या पहले से उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके नहीं निकलता. कई मामलों में डॉक्टर को यह तय करना पड़ता है कि मरीज से आगे क्या पूछा जाए और कौन-सी जांच वास्तव में जरूरी है.
माइक्रोसॉफ्ट का नया दृष्टिकोण इसी अंतर पर केंद्रित है. यह निदान को केवल इनपुट और आउटपुट की प्रक्रिया के बजाय कई चरणों में होने वाले निर्णयों के रूप में प्रस्तुत करता है.
इसमें मरीज से सवाल पूछना, संभावित बीमारियों पर विचार करना, जांचों का चयन करना और मिलने वाली नई जानकारी के आधार पर अगले कदम तय करना शामिल है.
यदि इस तरह की तकनीक वास्तविक क्लिनिकल परिस्थितियों में प्रभावी साबित होती है, तो यह डॉक्टरों को जटिल मामलों की समीक्षा करने और संभावित निदान पर विचार करने में सहायता दे सकती है.
अस्पतालों में AI की भूमिका बढ़ने की संभावना
AI आधारित निदान प्रणाली का एक संभावित लाभ यह है कि यह डॉक्टरों को किसी मामले के विभिन्न पहलुओं पर व्यवस्थित ढंग से विचार करने में मदद कर सकती है. विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जहां लक्षण अस्पष्ट हों या कई बीमारियों की संभावना हो, अतिरिक्त विश्लेषण उपयोगी साबित हो सकता है.
भविष्य में इस तरह के सिस्टम का उपयोग डॉक्टरों के लिए निर्णय-सहायक उपकरण के रूप में किया जा सकता है. यह संभावित निदान सुझाने, आगे की जांचों पर विचार करने या किसी महत्वपूर्ण जानकारी की कमी की ओर ध्यान दिलाने में मदद कर सकता है.
हालांकि, इसके लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि AI के सुझाव विश्वसनीय हों, विभिन्न आयु वर्गों और मरीजों के समूहों में उचित प्रदर्शन करें तथा गलत निष्कर्ष देने की स्थिति में उनकी सीमाओं को पहचाना जा सके.
चिकित्सा क्षेत्र में किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगिता का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होता है.
क्या AI डॉक्टरों की जगह ले सकेगा?
इस शोध के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या भविष्य में AI डॉक्टरों की जगह ले सकता है. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.
डॉक्टरों का काम केवल लक्षणों से बीमारी की पहचान करना नहीं है. इसमें मरीज की शारीरिक जांच, व्यक्तिगत और पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री समझना, उपचार के जोखिमों का मूल्यांकन करना, मरीज की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना और जरूरत के अनुसार उपचार में बदलाव करना भी शामिल है.
इसके अलावा, वास्तविक चिकित्सा परिस्थितियों में जानकारी अधूरी हो सकती है और मरीज की हालत तेजी से बदल सकती है. ऐसे मामलों में चिकित्सकीय निर्णय, मानवीय संवाद और जिम्मेदारी का विशेष महत्व होता है.
AI की बेहतर सटीकता का दावा आशाजनक जरूर है, लेकिन इसे चिकित्सकीय विशेषज्ञता का पूर्ण विकल्प मानने से पहले व्यापक स्वतंत्र परीक्षण और वास्तविक अस्पतालों में मूल्यांकन आवश्यक होगा.
तकनीक के साथ सुरक्षा और जवाबदेही भी जरूरी
मेडिकल AI के इस्तेमाल में मरीजों की निजी जानकारी की सुरक्षा, गलत निदान का जोखिम और निर्णयों की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं. यदि कोई सिस्टम गलत निष्कर्ष देता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसके सुझाव की समीक्षा किस तरह होगी और अंतिम चिकित्सकीय निर्णय कौन लेगा.
इसी तरह, AI के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल कुल सटीकता के आधार पर नहीं होना चाहिए. यह भी देखना जरूरी है कि वह किन बीमारियों में बेहतर काम करता है, किन परिस्थितियों में गलतियां करता है और क्या अलग-अलग मरीज समूहों में उसके परिणाम समान रूप से भरोसेमंद हैं.
ऐसी सावधानियां यह तय करने में मदद करेंगी कि इस तकनीक का उपयोग कहां और किस सीमा तक किया जा सकता है.
मेडिकल निदान के भविष्य की ओर एक अहम कदम
माइक्रोसॉफ्ट का यह शोध चिकित्सा क्षेत्र में AI के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करता है. अब जोर केवल उपलब्ध जानकारी से तुरंत जवाब प्राप्त करने पर नहीं, बल्कि डॉक्टरों की तरह सवाल पूछने, जानकारी जुटाने और क्रमिक रूप से निष्कर्ष तक पहुंचने वाली प्रणालियां विकसित करने पर भी है.
जटिल मेडिकल मामलों में बेहतर प्रदर्शन का दावा इस दिशा में महत्वपूर्ण है. लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होगी कि यह सिस्टम वास्तविक मरीजों के मामलों में कितना सुरक्षित और प्रभावी साबित होता है.
फिलहाल, इस तकनीक को डॉक्टरों की जगह लेने वाली मशीन के बजाय संभावित निदान और चिकित्सकीय निर्णय में सहायता देने वाले एक नए उपकरण के रूप में देखना अधिक उचित होगा. यदि आगे के परीक्षणों में इसकी विश्वसनीयता साबित होती है, तो यह भविष्य में चिकित्सा सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में भूमिका निभा सकता है.

