महाराष्ट्र 400 करोड़ हीस्ट केस में बड़ा मोड़ आया है। नासिक ग्रामीण पुलिस की SIT द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी है।
राष्ट्र संवाद
मुंबई (इंद्र यादव) महाराष्ट्र के चर्चित ₹400 करोड़ के कैश लूट और अपहरण मामले ने अब एक नया और नाटकीय मोड़ ले लिया है। नासिक ग्रामीण पुलिस की ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’ (SIT) द्वारा इस पूरे मामले को “फर्जी” बताकर बंद करने की कोशिशों पर राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस कमान ने कड़ा रुख अपनाया है। अब इस हाई-प्रोफाइल केस की कमान महाराष्ट्र CID को सौंप दी गई है।
क्या है पूरा मामला!
यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। एक व्यापारी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कर्नाटक से गुजरात के एक आश्रम में ले जाई जा रही ₹400 करोड़ की पुरानी करंसी (₹2000 के नोट) को चोरला घाट के पास लूट लिया गया और उसका अपहरण किया गया। नासिक की ‘घोटी पुलिस’ में मामला दर्ज होने के बाद इसकी जांच के लिए SIT बनाई गई थी।
SIT की जांच पर क्यों उठे सवाल!
हैरानी की बात यह है कि जिस केस में ₹400 करोड़ के गबन और अपहरण जैसे गंभीर आरोप थे, उसे SIT ने मात्र 25 दिनों में ही “मनगढ़ंत” बता दिया।
क्लोरर रिपोर्ट: SIT ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर कहा कि न तो कोई लूट हुई और न ही अपहरण।
आरोपियों की रिहाई: गिरफ्तार किए गए 8 रसूखदार आरोपियों (जिसमें बिल्डर, हवाला ऑपरेटर और पुलिस अधिकारी शामिल थे) को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया।
नियमों की अनदेखी: समीक्षा में पाया गया कि सरकारी वकील (APP) की आपत्तियों के बावजूद SIT ने केस बंद करने की जल्दबाजी दिखाई।
CID जांच की रडार पर ‘अपने’ ही अधिकारी
राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा की गई आंतरिक समीक्षा में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जिसके कारण CID को मैदान में उतरना पड़ा!
अधिकारियों की भूमिका: कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि वे अनौपचारिक रूप से जांच को प्रभावित कर रहे थे।
सुपरफास्ट जांच: आखिर इतनी बड़ी रकम से जुड़े मामले की जांच सिर्फ 25 दिन में कैसे खत्म हो गई!
दस्तावेजों की जब्ती: CID ने अब नासिक ग्रामीण पुलिस से केस डायरी और सभी मूल दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।
SIT चीफ की सफाई!
दूसरी ओर, SIT प्रमुख और एडिशनल एसपी आदित्य मिलखेलकर ने अपने बचाव में कहा है कि जांच पूरी ईमानदारी से की गई थी और इसमें कोई दुर्भावना नहीं थी। उन्होंने किसी भी तरह के अनुचित प्रभाव या मिलीभगत से इनकार किया है।
बड़ा सवाल: क्या वास्तव में ₹400 करोड़ की लूट एक कहानी थी, या फिर रसूखदारों को बचाने के लिए पूरी फाइल ही “फर्जी” बना दी गई! अब CID की नई जांच से महाराष्ट्र पुलिस के महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

