राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जमशेदपुर महानगर द्वारा आयोजित “साहित्य गौरव सम्मान–2026” सह होली मिलन समारोह तुलसी भवन में अत्यंत गरिमामय, सुसंस्कृत एवं साहित्यिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम तीन सुव्यवस्थित सत्रों में संपन्न हुआ, जिसमें नगर के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं साहित्य-प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
समारोह का शुभारंभ अतिथियों के तिलक एवं गुलाल से पारंपरिक स्वागत तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उपासना सिन्हा एवं माधवी उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत वंदे मातरम् तथा श्री सर्वदानंद सिंह की सरस्वती वंदना ने वातावरण को भक्तिमय ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। प्रथम सत्र में मनोज सिंह, डॉ. प्रसेंजित तिवारी, डॉ. रागिनी भूषण एवं संदीप मुरारका को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन पूनम सिंह ने किया, जबकि परिषद गीत सोनी सुगंधा ने मधुर स्वर में प्रस्तुत किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में राजेन्द्र सिंह ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए परिषद की सतत साहित्य-साधना के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। महामंत्री सूरज सिंह राजपूत ने संगठन की गतिविधियों एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला, जबकि स्वागत भाषण ब्रजेन्द्र नाथ मिश्रा ने दिया।
द्वितीय सत्र में डॉ. सुशील साहिल के संचालन में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता राजेन्द्र सिंह ने की। रीना सिन्हा की सरस्वती वंदना के उपरांत प्रतिभा प्रसाद, सरिता सिंह, सबिता सिंह ‘मीरा’, सुस्मिता मिश्रा, शिप्रा शैनी, पूनम शर्मा ‘स्नेहिल’, क्षमा श्री, कुमार मनीष, कमल किशोर, सुखबिंदर कौर, आलोक माजरी, प्रेमलता सिंह, भोजेन्द्र नाथ झा, रीना गुप्ता, संगीता मिश्रा एवं राजीव सिंह सहित अनेक कवि-कवयित्रियों ने विविध रसों से सजी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तृतीय सत्र में सम्मान समारोह के अंतर्गत सर्वश्री शीतल प्रसाद दुबे, मामचंद अग्रवाल ‘वसंत जमशेदपुरी’ एवं श्रीमती अनीता निधि को “साहित्य गौरव सम्मान–2026” से अलंकृत किया गया। सम्मानित साहित्यकारों का परिचय सुरेश चंद्र झा, आरती श्रीवास्तव एवं लक्ष्मी सिंह ने प्रस्तुत किया तथा प्रशस्ति-पत्र का वाचन सूरज सिंह राजपूत, सोनी सुगंधा एवं रीना सिन्हा ने किया।
सम्मानित रचनाकारों ने परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए साहित्य-साधना के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन भोजेन्द्र नाथ झा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन साहित्यिक ऊर्जा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

