लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
गिरिडीह। मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के अंबाटांड़ तालाब में गुरुवार को नहाने के दौरान आठ वर्षीय छात्र फरहान अंसारी की डूबने से मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया, जबकि आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंचकर स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और उचित मुआवजे की मांग की। यह घटना एक बार फिर विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अंबाटांड़ तालाब में हुई यह दुखद गिरिडीह छात्र की मौत पूरे इलाके में शोक का कारण बन गई है।
मृतक फरहान अंसारी झगरी गांव निवासी मो. कलीम अंसारी का पुत्र था। वह झगरी उत्क्रमित विद्यालय में दूसरी कक्षा का छात्र था। बताया जाता है कि गुरुवार सुबह वह अपने छोटे भाई और छोटी बहन के साथ प्रतिदिन की तरह स्कूल गया था। आरोप है कि विद्यालय पहुंचने के बाद उसने कक्षा में अपना बैग रखा और दो अन्य बच्चों के साथ बिना किसी की जानकारी के अंबाटांड़ तालाब नहाने चला गया। नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। इस तरह की घटनाएँ अक्सर बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों को उजागर करती हैं।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों ने तुरंत तालाब से बच्चे को बाहर निकाला और इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और गांव में भी शोक की लहर फैल गई। मासूम फरहान का असामयिक निधन सभी को स्तब्ध कर गया।
स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही और आक्रोशित परिजन
घटना से नाराज परिजन और ग्रामीण विद्यालय पहुंचे और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। उनका आरोप है कि विद्यालय में समय पर प्रार्थना सभा और उपस्थिति दर्ज नहीं की जाती तथा बच्चों की पर्याप्त निगरानी नहीं होती। परिजनों का कहना है कि जब कोई बच्चा विद्यालय परिसर में प्रवेश कर जाता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी विद्यालय और शिक्षकों की होती है। ऐसे में फरहान का कक्षा में बैग रखकर स्कूल से बाहर निकल जाना और शिक्षकों को इसकी भनक तक नहीं लगना विद्यालय प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। यह घटना विद्यालयों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपनी सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा करें।
शिक्षिका का बयान और पुलिस जांच
वहीं विद्यालय की शिक्षिका फरीदा खातून ने बताया कि घटना के समय विद्यालय में वह अकेली शिक्षिका मौजूद थीं, जबकि दूसरे शिक्षक अवकाश पर थे। उनके अनुसार छात्र बिना किसी जानकारी के विद्यालय से बाहर निकल गया था और घटना की सूचना मिलने के बाद उन्हें इसकी जानकारी हुई। इस बयान ने विद्यालय में स्टाफ की कमी और निगरानी की समस्या को भी उजागर किया है।
इधर सूचना मिलने पर मुफ्फसिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को न्याय मिल सके।
विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल और गिरिडीह छात्र की मौत
फिलहाल इस दर्दनाक हादसे ने विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना देश भर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित हाथों में सौंपते हैं, और यह स्कूल प्रशासन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। विभिन्न राज्यों में स्कूलों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन अनिवार्य है। इन दिशानिर्देशों में छात्रों की उपस्थिति की नियमित जांच, स्कूल परिसर में आवाजाही पर नियंत्रण, और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए प्रोटोकॉल शामिल होते हैं।
स्थानीय लोग भी विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति, सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था को और सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस गिरिडीह छात्र की मौत के बाद, समुदाय में सुरक्षा मानकों में सुधार की मांग तेज हो गई है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए, स्कूलों को न केवल पर्याप्त स्टाफ रखना चाहिए बल्कि स्टाफ को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रशिक्षित भी करना चाहिए। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर स्कूलों में सुरक्षा ऑडिट करवाना चाहिए और कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। अधिक जानकारी के लिए, आप बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कानूनों और दिशानिर्देशों के बारे में यहां पढ़ सकते हैं।
यह घटना सिर्फ एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा सदमा है। सभी की यही कामना है कि फरहान अंसारी को शांति मिले और भविष्य में किसी और बच्चे को ऐसी दुखद नियति का सामना न करना पड़े। अधिकारियों को चाहिए कि वे इस मामले में त्वरित और पारदर्शी जांच करें और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय करें।

