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    Home » बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस को मिली 11 धार्मिक एवं धरोहर स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
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    बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस को मिली 11 धार्मिक एवं धरोहर स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 28, 2026No Comments4 Mins Read
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    पटना, 28 जुलाई बिहार की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने राज्य के 11 धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी) को सौंपने का फैसला किया।

    बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस को सौंपे गए प्रमुख स्थल

    राज्य के गृह विभाग की ओर से मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, बीएसएपी को जिन स्थलों की सुरक्षा का दायित्व सौंपा जाना है, उनमें सीतामढ़ी का पुनौरा धाम व बड़ही धाम मंदिर, वैशाली का बुद्ध अवशेष स्तूप, सारण के सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर, गया का विष्णुपद मंदिर, पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर जी, पटना का महावीर मंदिर, राजगीर का विश्व शांति स्तूप, नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर, भागलपुर स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय के खंडहर और सासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा शामिल हैं।

    पुनौरा धाम और बड़ही धाम: सीतामढ़ी की आस्था का केंद्र

    सीतामढ़ी स्थित पुनौरा धाम माता सीता की जन्मस्थली के रूप में विश्वविख्यात है। मान्यता है कि यहीं पर राजा जनक को हल जोतते समय माता सीता प्राप्त हुई थीं। यहां प्रतिवर्ष विवाह पंचमी और सीता नवमी पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वहीं बड़ही धाम भी प्राचीन शिव मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है जहां सावन मास में कांवरियों का तांता लगा रहता है। इन दोनों मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करना प्रशासन की प्राथमिकता रही है।

    वैशाली का बुद्ध अवशेष स्तूप: बौद्ध धर्म की अमूल्य धरोहर

    वैशाली में स्थित बुद्ध अवशेष स्तूप बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। यह उन आठ मूल स्तूपों में से एक है जहां भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अवशेषों को रखा गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित यह स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की प्रतीक्षा सूची में भी है। यहां प्रतिवर्ष हजारों विदेशी पर्यटक, विशेषकर जापान, थाईलैंड, श्रीलंका और म्यांमार से बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु आते हैं।

    हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर: हरिहर क्षेत्र का प्रसिद्ध धाम

    सारण जिले के सोनपुर में गंडक और गंगा नदी के संगम तट पर स्थित हरिहरनाथ मंदिर भगवान विष्णु और शिव के संयुक्त रूप हरिहर को समर्पित है। यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला का केंद्र बिंदु है जो एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालु स्नान और दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं। मंदिर की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसकी सुरक्षा बीएसएपी को देना महत्वपूर्ण कदम है।

    गया का विष्णुपद मंदिर और पटना साहिब: मोक्ष और आस्था की नगरी

    गया स्थित विष्णुपद मंदिर हिंदुओं के लिए पिंडदान और मोक्ष प्राप्ति का सबसे प्रमुख तीर्थ है। फल्गु नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में भगवान विष्णु के चरण चिह्न स्थापित हैं। पितृपक्ष मेला के दौरान यहां देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री आते हैं। वहीं पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर जी सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है और सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक है। यहां गुरु पर्व और बैसाखी पर भव्य आयोजन होता है जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

    नालंदा और विक्रमशिला: प्राचीन ज्ञान की धरोहर

    नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर विश्व के प्राचीनतम आवासीय विश्वविद्यालय के अवशेष हैं जो 5वीं से 12वीं शताब्दी तक ज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा। इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। इसी प्रकार भागलपुर स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय के खंडहर तांत्रिक बौद्ध शिक्षा के प्रमुख केंद्र थे जिसे राजा धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी में स्थापित कराया था। दोनों स्थल पुरातात्विक महत्व के हैं और यहां शोधकर्ताओं तथा पर्यटकों का आवागमन बना रहता है।

    राजगीर का विश्व शांति स्तूप और शेरशाह का मकबरा

    राजगीर का विश्व शांति स्तूप रत्नागिरी पर्वत पर स्थित है जिसे जापानी बौद्ध भिक्षु निप्पोजान म्योहोजी ने 1969 में बनवाया था। यह विश्व शांति का प्रतीक है और रोपवे के माध्यम से यहां पहुंचा जाता है। वहीं सासाराम स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा अफगान वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है जो एक कृत्रिम झील के बीच में स्थित है। शेरशाह सूरी ने ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण कराया था और उसका मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक है।

    अधिकारियों ने बताया कि इन सभी स्थलों पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

    अधिसूचना के मुताबिक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम की धारा 2(11) और धारा 3(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने इन 11 धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों की सुरक्षा एवं संरक्षण की जिम्मेदारी बीएसएपी को सौंपने का फैसला किया है।

    अधिसूचना में बताया गया कि इसके साथ ही इन्हें तत्काल प्रभाव से अधिसूचित संस्थान घोषित किया गया है।

    धरोहर धार्मिक स्थल बीएसएपी
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