ग्वालकाटा में पीडीएस राशन घोटाले का आरोप, तीन माह में 10 लाख की कालाबाजारी का दावा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा: पोटका प्रखंड अंतर्गत ग्वालकाटा पंचायत के पीडीएस डीलर मिकी हंसदा पर कार्डधारियों को पिछले तीन माह से राशन नहीं देने और उनके हिस्से के खाद्यान्न को कालाबाजार में बेचने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि डीलर ने कार्डधारियों से फिंगर प्रिंट लेकर भी राशन का वितरण नहीं किया और करीब 10 लाख रुपये की अवैध कमाई की।
राशन नहीं मिलने से आक्रोशित कार्डधारी जब डीलर के घर पहुंचे और राशन की मांग की, तो डीलर ने उल्टे पोटका थाना में कार्डधारियों के खिलाफ घर से चावल, जेवरात और नकदी लूट का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करा दी। यह आरोप सही है या गलत, यह पुलिस जांच का विषय बताया जा रहा है।
आरोपों के अनुसार, मिकी हंसदा के बहनोई जगन्नाथ सोरेन द्वारा दुकान का संचालन किया जाता है। विभागीय निर्देश के अनुसार पीडीएस दुकानों में कम से कम 95 प्रतिशत पंचिंग और वितरण होना चाहिए, लेकिन मिकी हंसदा का रिकॉर्ड लगातार खराब रहा है।
नवंबर 2025: 85 प्रतिशत पंचिंग, वितरण शून्य
दिसंबर 2025: 66 प्रतिशत पंचिंग, वितरण शून्य
जनवरी 2026: पंचिंग व वितरण शून्य
इसके बावजूद जनवरी के अंतिम सप्ताह में ही डीलर को अधिकारियों की कथित विशेष कृपा से फरवरी माह का भी खाद्यान्न आवंटित कर दिया गया, जिससे विभागीय भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
मिकी हंसदा के पास मां मनसा महिला समिति की दुकान भी टैग है। इस दुकान के माध्यम से चार माह में कुल 293 क्विंटल चावल और 73 क्विंटल गेहूं का उठाव किया गया, जबकि वितरण शून्य बताया जा रहा है। खुले बाजार में इसकी कीमत लगभग 10 लाख रुपये आंकी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मिकी हंसदा अकेला मामला नहीं है। प्रखंड के मानपुर सहित एक दर्जन से अधिक पीडीएस डीलरों का वितरण रिकॉर्ड खराब है, लेकिन विभागीय स्तर पर कभी गंभीर जांच नहीं होती। शिकायत पर केवल शो-कॉज नोटिस देकर मामले को दबा दिया जाता है। पिछले 20 वर्षों के अनुभव में देखा गया है कि डीलर निलंबित होते हैं, कभी-कभी दुकान रद्द भी होती है, लेकिन न्यायालय के आदेश से पुनः बहाल हो जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक नुकसान कार्डधारियों को उठाना पड़ता है, जिन्हें महीनों का राशन कभी वापस नहीं मिल पाता।
इधर, झारखंड मुक्ति मोर्चा के पोटका प्रखंड अध्यक्ष सुधीर सोरेन के नेतृत्व में पोटका अंचल पदाधिकारी से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं, पोटका के अंचल पदाधिकारी सह प्रभारी सीडीपीओ एवं आपूर्ति पदाधिकारी के जमशेदपुर प्रखंड में नामांकन कार्य से मुक्त किए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।


