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    Breaking News Headlines राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय संवाद विशेष

    लोकतंत्र की सार्थकता साबित करने वाले परिणाम

    News DeskBy News DeskDecember 10, 2022No Comments4 Mins Read
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    लोकतंत्र की सार्थकता साबित करने वाले परिणाम

     

    गुरुवार को गुजरात, हिमाचल विधानसभा के साथ ही कई जगहों पर लोकसभा के लिए हुए उपचुनावों के परिणाम घोषित हुए। इससे एक दिन पहले दिल्ली एमसीडी के चुनाव परिणाम घोषित हुए। अगर, गुजरात, हिमाचल और दिल्ली एमसीडी चुनावों की बात करें तो यहां मुख्य रूप से बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी चुनाव मैदान में थीं। एक तरह से देखा जाए तो इन तीनों ही पार्टियों के लिए ये चुनाव इसीलिए संतोषजनक रहे,

     

    क्योंकि दिल्ली एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी को जीत मिली। गुजरात में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली, जबकि हिमाचल में कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में आ गई। इसीलिए चुनाव परिणाम आने के बाद तीनों ही पार्टियों में जश्न का माहौल देखने को मिला।
    गुजरात की बात करें तो यहां बीजेपी 156 सीट जीतने में कामयाब हुई। यह बीजेपी की यहां ऐतिहासिक जीत रही। गुजरात में कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं, जबकि आम आदमी पार्टी को 5 और अन्य को 4 सीटें मिलीं। गुजरात में बीजेपी की ही सरकार थी और यहां बीजेपी के जीतने की पूरी उम्मीद इसीलिए थी,

     

    क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का गढ़ भी है। यहां, जिस तरह से बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली है, उसमें यह स्पष्ट झलका भी है।

    दरअसल, यहां बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को सामने रखकर लड़ा और उसे इसका उसे पूर्ण फायदा मिला। राज्य के करीब डेढ़ दर्जन ऐसे जिले थे, जहां पीएम मोदी ने रैलियों के जरिए चुनाव प्रचार करने के लिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और इनमें से अधिकांश जिलों में बीजेपी ने सभी विधानसभा सीटें जीत लीं, यानि गुजरात में पीएम मोदी का जादू जमकर चला। अहमदाबाद की सभी 21 सीटें बीजेपी ने जीतीं। सूरत की सभी 16 सीटें भी बीजेपी ने ही जीतीं। इसके अलावा भरुच की सभी पांच, छोटा उदयपुर की सभी तीन, दाहोद की सभी छह, द्वारका की सभी दो

    राजधानी गांधीनगर की सभी पांच, कच्छ की सभी छह और खेड़ा की सभी सात सीटें बीजेपी जीतने में सफल रही। इतना ही नहीं, सस्पेंशन ब्रिज हादसे के कारण चर्चा में रहे मोरबी जिले की सभी तीन सीटें भी बीजेपी जीतने में सफल रही। पंचमहल की सभी पांच, राजकोट की सभी आठ, सुरेंद्रनगर की सभी पांच, तापी की सभी दो सीटें जीती। वडोदरा की 10 सीटों में से नौ पर बीजेपी ने कब्जा जमा लिया, जबकि एक पर निर्दलीय की जीत हुई।वलसाड की सभी पांच सीटें बीजेपी ने जीतीं। गुजरात में अपेक्षाकृत सीट नहीं मिलने से कांग्रेस को जरूर मायूसी हाथ लगी, लेकिन कांग्रेस की इस मायूसी को हिमाचल ने पूरा कर दिया। कांग्रेस को यहां की 68 विधानसभा सीटों में से 40 सीटें जीतने में सफलता मिलीं, बीजेपी 25 सीट जीत पाई। आम आदमी पार्टी का हिमाचल में कोई भी खाता नहीं खुला, लेकिन गुजरात में पांच सीटें जीतकर उसने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा जरूर हासिल कर दिया।

     

    कुल मिलाकर पूरी स्थिति का निचोड़ देखें तो गुजरात चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने पर बीजेपी को बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसके हाथ से हिमाचल भी चला गया और दिल्ली एमसीडी चुनाव में भी उसे आम आदमी पार्टी से पटखनी खानी पड़ी। दिल्ली एमसीडी में पिछले 20 साल से बीजेपी का कब्जा था। दिल्ली के 250 वार्डों में से आम आदमी पार्टी ने 134 सीटें जीती, जबकि बीजेपी के खाते में 104 सीटें ही आ पाई। उधर, मुलायम सिंह के निधन के बाद खाली हुई उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट को रिकॉर्ड वोटों से जीतकर उनकी बहू डिंपल यादव सांसद बन गईं हैं।

     

    रामपुर सीट पर सपा को बड़ा झटका लगा, क्योंकि यहां पिछले 71 सालों में कमल खिला। यहां हुए उपचुनाव में जीत का सेहरा बीजेपी प्रत्याशी सक्सेना के सिर पर बंधा, उन्होंने यहां सपा नेता आजम खान के करीबी आसिम राजा को करीब 33 हजार वोटों से हराया।

     

    इन परिणामों से लोकतंत्र की सार्थकता साबित हुई है, क्योंकि जनता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। जहां, पार्टियां विकास में पिछड़ेंगीं, वहां निश्चित रूप से बदलाव होगा।

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