गदरा में आनंद मार्ग का तीन दिवसीय प्रथम संभागीय सेमिनार आनंद मार्ग प्रचारक संघ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रथम संभागीय सेमिनार
के प्रथम दिन आनंद मार्ग के वरिष्ठ प्रशिक्षक आचार्य स्वरूपानंद अवधूत
ने “सभ्यता का भविष्य” विषय पर बोलते हुए विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि सभ्यता एक जीवधारी की तरह है जिसका जन्म जवानी एवं मृत्यु होती है। तीन चरणों या कालो मे सभ्यता का विस्तार है- प्राचीन कालीन, वर्तमान काल की आधुनिक युग की सभ्यता का विस्तार है- प्राचीन कालीन, वर्तमान काल की आधुनिक युग की नेता एवं भविष्य की सभ्यता। टायनवी के अनुसार कुल 21 सभ्यताएं हैं जिनमें 6 प्रमुख है- पश्चिमी, कहर चर्च, दूर पूर्वी, ईरानी, अरबी एवं हिंदू सभ्यता कुछ सभ्यताएं अभी मरण शय्या पर है। आचार्य जी ने कहा की भविष्य के लिए श्री प्रभात रंजन सरकार ने आनंद मार्ग नई ग्रामीण तांत्रिक सभ्यता का सूत्रपात सन् 1939 प्रथम शिक्षा दान करके किया था। आनंद मार्ग प्रचारक संघ संगठन बना 1955 में। पूर्ण दर्शन संपूर्णता में आया-1959मे। मिशन का रूप लिया 1962 में जब प्रथम अवधूत दीक्षा दी गई। श्री प्रभात रंजन सरकार ने शदविप्र नेतृत्व का सृजन किया एवं भविष्य की सभ्यता के मुख्य आधार की न्यू रखी। भविष्य की इस सभ्यता के लिए 6 अनिवार्य तत्व है जिन पर टिका रह सकेगा वे 6 तत्व है- अध्यात्मिक दर्शन, अध्यात्मिक साधना पद्धति, सामाजिक अर्थनैतिक सिद्धांत, सामाजिक दृष्टिकोण, शास्त्र एवं प्रवर्तक (गुरु) कोई भी सभ्यता के लिए तीन चीजें आवश्यक है – अस्ति , भाति,आनंदम्। भाति के अंतर्गत ही उपरोक्त 6तत्व समाहित हैं। सभ्यता के संरक्षक अर्थात भविष्य कालीन सभ्यता के एकमात्र संरक्षक सदविप्र होगे जिनके हाथों में समाज चक्र का नियंत्रण रहेगा। यह ऐसा नेतृत्व होगा जिसका लक्ष्य है, केवल प्राप्ति। आस्ति अस्तित्व के बारे में सचेत रहेंगे छह तत्वों की उपस्थिति बनी रहेगी, वे नैतिकता में शक्तिशाली होंगे एवं अनैतिकता

