मुंबई. पिछले साल पंजाब एंड महाराष्ट्र (PMC) को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़ा एक घोटाला सामने आया था. इस मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सुई अब शिवसेना सांसद संजय राउत के परिवार पर आ रुकी है. इस मामले से जुडी पूछताछ करने के लिए ED ने सोमवार को शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को अपने दफ्तर बुलाया.
संजय राउत की पत्नी से हुई पूछताछ : पंजाब एंड महाराष्ट्र (PMC) को-ऑपरेटिव बैंक से घोटाले के तहत घोटाले की रकम की राशि 6500 रुपये थी. इस मामले में मेट्रोपोलिटन अदालत में 32 हजार पन्नों की चार्जशीट जमा की गई थी. इस ममले में जब कड़िया जुड़ने लगी तो शिवसेना सांसद संजय राउत और उनके परिवार का नाम भी सामने आया. उनका नाम सामने आते ही ED की टीम तुरंत एक्टिव हो गई और पहले संजय राउत को पूछताछ के लिए बुलया और अब ED ने इस घोटाले से जुड़े सवाल पूछने के लिए उनकी पत्नी वर्षा राउत को आज ED के दफ्तर बुलाया.
संजय राउत ने साधा एजेंसी पर निशाना : प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पत्नी वर्षा राउत को समन भेजने के बाद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एजेंसी पर निशाना साधा और BJP के निर्देश पर काम करने का आरोप लगाया. साथ ही भड़कते हुए कहा कि, “हम किसी से भी डरने वाले नहीं है. महिलाओं को टारगेट करना कायरता है. घर की महिलाओं को निशाना बनाना कायरता का काम है. हम किसी से डर नहीं रहे हैं और मांगे गए जवाब के अनुसार ही प्रतिक्रिया देंगे. ईडी को कुछ पेपर चाहिए थे, जिसे हमनें समय पर सब्मिट कर दिए.’
धोखाधड़ी की शुरुआत : इस धोखाधड़ीकी शुरुआत कुछ ऐसे हुई कि, प्रवीण राउत ने अपनी पत्नी माधुरी को 1.6 करोड़ रुपये दिए थे और माधुरी ने इसके बाद साल 2010 और 2011 में ब्याज दर लिए बिना 55 लाख रुपये वर्षा राउत को कर्ज दिया था. इस मामले में ED ने बताया कि, ‘इस रकम का इस्तेमाल वर्षा राउत ने दादर में फ्लैट खरीदने में किया. जांच में पता चला कि वर्षा राउत और माधुरी अवनी कंस्ट्रक्शन में पार्टनर हैं. 12 लाख रुपये की राशि अभी भी बकाया है. ED के अधिकारी इन लेनदेन के संबंध में वर्षा राउत से पूछताछ करना चाहते हैं.
क्या था PMC बैंक घोटाला मामला : PMC बैंक घोटाले की खबर सितंबर में सामने आई थी. इस मामले में बैंक ने लगभग दिवालिया हो चुके HDIL को दिये गए लोन में लगभग 6,700 करोड़ रुपये को छुपाने की मंशा से ऐसे अकाउंट खोले, जिनकी जानकारी बैंक को नहीं थी. 23 सितंबर 2019 को RBI द्वारा बैंक पर नियामक प्रतिबंध लगा दिये गए थे. शुरुआत में इन अकॉउंटहोल्डरों के लिये पैसे निकलने की सीमा 1000 रुपये प्रतिदिन रखी गई थी, जिसे बाद में एक दम से ही बढ़ा कर 50 हजार रुपये कर दिया गया था.

