

बखरी PDS मेधा सूची पर आपत्ती, डीएम-एसडीएम को ज्ञापन
बेगूसराय जिले के बखरी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहनपुर पंचायत (EWS) के रिक्त PDS दुकान की औपबंधिक मेधा सूची पर आपत्ति जताई गई है। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है और आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर नियमों की अनदेखी कैसे हो गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन गड़बड़ियों को नहीं सुधारा गया, तो जरूरतमंदों का हक मारा जाएगा।
इस पूरे मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए क्रमांक-2 पर अंकित आवेदिका सिमरन कुमारी (ग्राम-गंगरहो, मोहनपुर) ने सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने बिहार सरकार के पोर्टल के माध्यम से जिलाधिकारी (DM) बेगूसराय और अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) बखरी को ऑनलाइन ज्ञापन सौंपकर इस पूरी चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आवेदिका की इस त्वरित कार्रवाई से चयन समिति में हड़कंप मच गया है।
चयन प्रक्रिया में भारी अनियमितता और नियमों की अनदेखी का आरोप
आवेदिका सिमरन कुमारी का गंभीर आरोप है कि मेधा सूची में क्रमांक-01 पर चयनित आवेदक संख्या 313, जिनका नाम पुरुषोत्तम सिंह (पिता-उपेन्द्र नारायण सिंह) है, उनका मूल निवास स्थान बखरी नगर परिषद क्षेत्र का है, न कि मोहनपुर पंचायत का। नियमानुसार, ग्रामीण क्षेत्रों की जन वितरण प्रणाली की दुकानों के आवंटन में स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता और पात्रता दी जाती है।
विस्तृत जानकारी के अनुसार, न्यायिक और प्रशासनिक नियमों का हवाला देते हुए आवेदिका ने स्पष्ट किया है कि बिहार TPDS आदेश 2016 के प्रावधानों के तहत आवेदक का उसी संबंधित पंचायत का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। इसके बावजूद बाहरी व्यक्ति का नाम सूची में शीर्ष पर होना कई बड़े सवाल खड़े करता है।
कई अन्य गंभीर बिंदुओं पर भी उठाये गए सवाल
सिर्फ निवास स्थान ही नहीं, बल्कि आवेदिका ने कई अन्य तकनीकी और वैधानिक त्रुटियों को भी उजागर किया है। उन्होंने मांग की है कि चयनित आवेदक के आवासीय प्रमाण-पत्रों की गहन जांच की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दस्तावेज असली हैं या फर्जीवाड़े के जरिए बनाए गए हैं। इसके अलावा, चयन प्रक्रिया में महिला आरक्षण का लाभ न मिलने और मेधा सूची में उनके पिता के नाम की जगह पति लिखे जाने जैसी अजीबोगरीब त्रुटियों पर भी गहरी आपत्ति जताई गई है।
इन तमाम गड़बड़ियों को देखते हुए आवेदिका ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो क्रमांक-01 पर हुए चयन को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। साथ ही, सभी पात्र अभ्यर्थियों के अंकों और योग्यताओं के अनुसार इस पर पुनः विचार किया जाए।
अंतिम निर्णय आने तक आवंटन प्रक्रिया पर रोक की मांग
ग्रामीणों और आवेदिका की मुख्य मांग यह है कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती और प्रशासन द्वारा कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक PDS दुकान के आवंटन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो ग्रामीण न्याय पाने के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हो सकते हैं। स्थानीय लोग अब जिला प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि वे इस मामले में क्या और कब तक सख्त कदम उठाते हैं।
