Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » संरा की स्थापना के 80 साल बाद भी शांति कायम करने के लिए जूझ रही सुरक्षा परिषद: भारत
    Breaking News Headlines राष्ट्रीय

    संरा की स्थापना के 80 साल बाद भी शांति कायम करने के लिए जूझ रही सुरक्षा परिषद: भारत

    News DeskBy News DeskOctober 23, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    (योषिता सिंह)

    संयुक्त राष्ट्र, 23 अक्टूबर (भाषा) भारत ने दुनिया के कुछ ‘‘सबसे गंभीर’’ संघर्षों में शांति और सुलह कायम करने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जूझने का जिक्र करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में मिली जीत के आधार पर हासिल अधिकार आज की ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी की भरपाई नहीं कर सकते, जिसमें दुनिया के सभी देशों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जो संगठन अपने प्रमुख अंग में बदलाव नहीं कर सकता, उसके लिए 1945 के बाद से काफी आगे बढ़ चुकी दुनिया में अपना प्राधिकार कायम रखना लगातार मुश्किल होता जाएगा।

    पर्वतनेनी ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और उसकी सदस्य संख्या बढ़ाने का सवाल’ विषय पर चर्चा के दौरान कहा, ‘‘इसकी कीमत पहले ही दिखाई दे रही है। 80 साल बाद भी यह संगठन परिषद के सामने मौजूद कुछ सबसे गंभीर संघर्षों में शांति और सुलह कायम करने में जूझ रहा है।’’

    भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘आठ दशक पहले मिली जीत से हासिल अधिकार आज की ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी की भरपाई नहीं कर सकता, जिसमें सभी का उचित प्रतिनिधित्व नहीं है।’’

    पर्वतनेनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वैश्विक संगठन की कमियों और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों तथा संघर्षों से निपटने में उसकी नाकामियों को रेखांकित किया।

    उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी युद्ध, खासकर 80 साल से भी पहले हुआ युद्ध, आज दुनिया की स्थिति तय नहीं कर सकता।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई थी, लेकिन आज के संयुक्त राष्ट्र के लिए उस वर्ष को ही एकमात्र आधार मानकर फैसले नहीं लिए जा सकते।

    उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी उस दौर से बहुत दूर आ चुकी है, जब इस संगठन का गठन हुआ था।

    पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘इतिहास हमें यह बता सकता है कि क्या नहीं करना चाहिए लेकिन समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए आज क्या किया जाना चाहिए, यह इतिहास तय नहीं कर सकता।’’

    उन्होंने कहा कि संघर्षों के बढ़ने और सुरक्षा परिषद के उन पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने में जूझने के कारण संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

    भारत ने विश्व युद्धों में विभिन्न देशों के बलिदानों को जानबूझकर दबाए जाने के मुद्दे को भी उठाया। उसने कहा कि विजेताओं द्वारा, विजेताओं के लिए और विजेताओं के हाथों बनाया गया संगठन युद्ध के पीड़ितों की चिंताओं को शामिल करने में विफल रहा।

    पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘विश्व युद्धों में अनगिनत बलिदान दिए गए, लेकिन उन्हें मान्यता नहीं मिली और कुछ मामलों में जानबूझकर दबा दिया गया।’’ उन्होंने कहा कि करीब 25 लाख भारतीयों ने युद्ध में हिस्सा लिया था और उनमें से लगभग 90,000 सैन्य सेवा के दौरान मारे गए थे।

    उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन की युद्ध नीतियों के कारण बंगाल के कुख्यात अकाल में 40 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

    पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘विजेताओं द्वारा, विजेताओं के लिए और विजेताओं के हाथों बनाए गए संगठन ने स्पष्ट रूप से पीड़ितों की चिंताओं को शामिल करने की परवाह नहीं की। समय बदल चुका है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भी बदलना होगा, ताकि उसकी प्रासंगिकता बनी रहे।’’

    वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट हासिल करने की कोशिश कर रहे भारत ने कहा कि एशिया-प्रशांत समूह में दुनिया की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है, लेकिन सुरक्षा परिषद में उसका प्रतिनिधित्व केवल एक स्थायी सदस्य और हर साल एक या दो निर्वाचित सदस्यों तक सीमित है।

    अफ्रीका और लातिन अमेरिका का भी सुरक्षा परिषद में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। इसके विपरीत, यूरोप के पास दो स्थायी और तीन निर्वाचित सदस्य हैं।

    संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार वाले पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। इसके अलावा, 10 सदस्य देशों को दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।

    भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्य संख्या बढ़ाने की मांग करता रहा है। पर्वतनेनी ने जोर देकर कहा कि केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने से बुनियादी असंतुलन दूर नहीं होगा, बल्कि इससे मौजूदा व्यवस्था और मजबूत होगी।

    वीटो व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि भारत का रुख सिद्धांतों पर आधारित है और उसमें कोई बदलाव नहीं आया है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleहैरी ब्रूक ने 114 गेंदों में जड़ा वनडे का सबसे तेज दोहरा शतक, शुभमन गिल का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा
    Next Article निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में विश्व रिकॉर्ड के साथ दूसरा स्वर्ण जीता

    Related Posts

    राखा माइंस रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बीच स्वच्छता को लेकर कार्यशाला आयोजित

    October 23, 2026

    पीएनके टाइप दुर्गा पूजा धूमधाम से संपन्न, कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों का रहा सराहनीय योगदान

    October 23, 2026

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क से मुलाकात की

    October 23, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    राखा माइंस रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बीच स्वच्छता को लेकर कार्यशाला आयोजित

    पीएनके टाइप दुर्गा पूजा धूमधाम से संपन्न, कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों का रहा सराहनीय योगदान

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क से मुलाकात की

    यूरोप की कई कार कंपनियां भारत में तलाश रहीं विनिर्माण के अवसर : गोयल

    झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का हंगामा

    निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एशियाई पैरा खेलों में विश्व रिकॉर्ड के साथ दूसरा स्वर्ण जीता

    संरा की स्थापना के 80 साल बाद भी शांति कायम करने के लिए जूझ रही सुरक्षा परिषद: भारत

    हैरी ब्रूक ने 114 गेंदों में जड़ा वनडे का सबसे तेज दोहरा शतक, शुभमन गिल का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा

    कार के बोनट पर पिता-पुत्र को 4 किलोमीटर तक घसीटा, ग्रामीणों ने पीछा कर रुकवाई गाड़ी

    ग्वालियर में 14 साल के बच्चे की बलि देने की कोशिश का आरोप, गले और सिर पर चाकू से किए 9 वार

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.