
जमशेदपुर में विजयादशमी पर रावण दहन का भव्य आयोजन रामलीला उत्सव समिति द्वारा किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर रावण की विशाल शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
विजयादशमी पर रावण दहन: शोभायात्रा और पुतला दहन का पूरा विवरण
रामलीला मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष रावण के पुतले की ऊंचाई 60 फीट रखी गई थी, जो आकर्षण का केंद्र रहा। विकास सिंह ने विधि-विधान के साथ रावण के पुतले का दहन किया। इस दौरान आतिशबाजी का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
शोभायात्रा में दिखी सांस्कृतिक झलक
शोभायात्रा में राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की झांकियों के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक दल भी शामिल थे। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की धुन पर युवा और बुजुर्ग सभी थिरकते नजर आए। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
रावण दहन के माध्यम से समाज में बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश प्रसारित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विजयादशमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आंतरिक बुराइयों को त्यागने का संकल्प दिवस है। रामलीला उत्सव समिति के अध्यक्ष ने आयोजन को सफल बनाने के लिए शहरवासियों का आभार व्यक्त किया।
जमशेदपुर की रामलीला परंपरा
जमशेदपुर में रामलीला का आयोजन दशकों पुरानी परंपरा है। टाटा स्टील के सहयोग और नागरिकों की भागीदारी से यह आयोजन हर वर्ष भव्य होता जा रहा है। इस वर्ष भी टाटा स्टील के अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। शहर के विभिन्न रामलीला मैदानों में समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे पूरा शहर उत्सवमय रहा।
यातायात और प्रशासनिक व्यवस्था
कार्यक्रम को देखते हुए जिला प्रशासन ने यातायात रूट में परिवर्तन किया था। प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा। अग्निशमन विभाग की गाड़ियां भी स्टैंडबाई मोड पर रहीं। भीड़ नियंत्रण के लिए वॉच टावर और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया गया।
इस पावन अवसर पर शहरवासियों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। मिठाइयों का आदान-प्रदान हुआ और परिवारों ने मिलकर मेले का आनंद लिया। रामलीला मैदान में लगे मेले में बच्चों ने झूलों और खिलौनों का लुत्फ उठाया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसी उपलक्ष्य में पूरे देश में विजयादशमी मनाई जाती है। जमशेदपुर का यह आयोजन झारखंड के प्रमुख आयोजनों में गिना जाता है। विजयादशमी का ऐतिहासिक महत्व जानने के लिए यहां क्लिक करें।
समापन के बाद श्रद्धालुओं ने रावण के पुतले की राख को पवित्र मानकर अपने साथ ले गए। मान्यता है कि यह राख घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस प्रकार जमशेदपुर में विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास, भाईचारे और शांति के साथ संपन्न हुआ।

