राष्ट्र हित में सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए: मोदी
नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से राष्ट्र हित में एकजुट होने और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का मंगलवार को आह्वान किया।
मोदी ने यह अपील ऐसे समय की है, जब सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए आम सहमति बनाने के प्रयास कर रही है।
राष्ट्रीय राजधानी में विजयादशमी समारोह में शामिल हुए मोदी ने देशवासियों से ‘राष्ट्र प्रथम’ का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर ‘मां भारती’ के शत्रुओं की पहचान कर उन्हें परास्त करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें, समाज में फूट डालने वाले लोग और “हमारी संस्कृति से नफरत करने वाली मानसिकता”—ये सभी राष्ट्र के शत्रु हैं।
मोदी ने ये टिप्पणियां तब की हैं, जब उनकी सरकार को विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है। ये विरोध-प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजधानी और विभिन्न राज्यों के कई अन्य स्थानों पर हुए ये विरोध-प्रदर्शन उन विदेशी ताकतों के इशारे पर आयोजित किए गए, जो भारत की प्रगति नहीं चाहतीं।
मोदी ने कहा कि रामराज्य को आज भी सुशासन का आदर्श माना जाता है। उन्होंने कहा कि रामराज्य में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता, हर व्यक्ति को न्याय मिलता है, सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध होते हैं और सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण होता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमें जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए भगवान राम से प्रेरणा लेनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्र हित के लिए सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए।
संस्कृत के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘हमारे विचारों में एकरूपता हो; देश की सभी संस्थाएं और सभी राजनीतिक दल राष्ट्र हित के लिए एकजुट हों। हमें इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए और देश के शत्रुओं के खिलाफ मिलकर लड़ना चाहिए।’’
अपनी सरकार के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘हमें अपने संसाधनों पर भरोसा करना चाहिए। हमें अपने संकल्प को शक्ति में बदलना चाहिए और अपने परिश्रम से समाधान तलाशने चाहिए। भगवान श्रीराम ने हमें सिखाया है कि कठिनाइयां हमारी यात्रा को नहीं रोक सकतीं।”
उन्होंने कहा, ‘‘संकट कितना भी बड़ा हो, चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो…, हमें दूसरों के भरोसे बैठकर नहीं रहना चाहिए।’’
मोदी ने कहा, ‘‘हमें अपनी ताकत को पहचानना चाहिए। अपने संसाधनों पर भरोसा रखना चाहिए। अपने संकल्प को शक्ति में बदलना चाहिए और अपने परिश्रम से समाधान तलाशने चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह पर्व हमें साहस देता है कि शत्रु चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, यदि हम सत्य और मानवता के साथ खड़े हैं, तो अंततः विजय हमारी ही होगी। दशहरे की यही भावना सदैव भारत की विचारधारा रही है।’’
मोदी ने कहा कि भगवान राम ने लोगों को सिखाया कि रास्ते में आने वाली कठिनाइयां यात्रा को नहीं रोक सकतीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई राष्ट्र तभी प्रगति करता है, जब उसमें स्वाभिमान की भावना होती है और इस स्वाभिमान को गढ़ने में उसकी विरासत की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘यही वजह है कि आज देश अपनी विरासत और पहचान को संरक्षित करने की दिशा में काम कर रहा है।’’
मोदी ने कहा कि सदियों तक भारत की कलाकृतियों को लूटा गया और उन्हें विदेश ले जाया गया, लेकिन आज सरकार उन अमूल्य धरोहरों को वापस ला रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियों को भारत वापस लाया गया है। भारत अपने सांस्कृतिक केंद्रों को वैश्विक मंच पर नयी पहचान दे रहा है। विजयादशमी विजय का पर्व है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘यही भगवान श्रीराम का आदर्श है। इसलिए हमें सदैव जनता को जनार्दन मानकर ‘नागरिक देवो भव:’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ना चाहिए। हमें गरीबों और वंचितों की सेवा को सर्वोपरि रखना चाहिए।’’

