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    Home » विरोध की आजादी और व्यापारियों की आजीविका, दोनों की रक्षा जरूरी
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    विरोध की आजादी और व्यापारियों की आजीविका, दोनों की रक्षा जरूरी

    Devanand SinghBy Devanand SinghOctober 15, 2026No Comments2 Mins Read
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    विरोध की आजादी और व्यापारियों की आजीविका, दोनों की रक्षा जरूरी

    देवानंद सिंह
    लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, लेकिन विरोध के नाम पर आम जनता की जिंदगी और व्यापारियों की आजीविका को संकट में डालना भी उचित नहीं है। दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में 16 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख इसी सवाल को सामने लाता है। अदालत ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन पुलिस को गतिविधियों को नियंत्रित और व्यवस्थित करने के आश्वासन के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी दिया।
    त्योहारी मौसम में बाजारों की रौनक व्यापारियों के लिए उम्मीद लेकर आती है। ऐसे समय में यदि विरोध-प्रदर्शनों के कारण दुकानें बंद होती हैं, ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है और कारोबार ठप पड़ता है, तो नुकसान केवल दुकानदार का नहीं, बल्कि उससे जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों का भी होता है। इसलिए व्यापारियों की चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
    दूसरी ओर, लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। किसी संगठन की मांगों से असहमति होने या उससे असुविधा होने मात्र से उसकी आवाज पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि प्रदर्शन भी हो, कानून-व्यवस्था भी बनी रहे और आम नागरिकों को परेशानी भी न उठानी पड़े।
    कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ कनॉट प्लेस में एकत्र होने की अपील की है। पार्टी के दो सदस्यों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद यह आह्वान किया गया। इस मामले में आरोपों और कानूनी कार्रवाई का आकलन तथ्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल भावनाओं और राजनीतिक दावों के आधार पर।
    अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की है। उसे ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, यातायात बाधित न हो और व्यापारियों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। प्रशासन की सफलता प्रदर्शन रोकने में नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा करने में है।
    संपादकीय निष्कर्ष: विरोध लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन जिम्मेदारी उसकी मर्यादा। प्रदर्शनकारियों को अपने अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करना चाहिए। वहीं, प्रशासन को व्यापारियों की आजीविका और नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखते हुए निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब विरोध की आवाज भी सुनी जाए और आम जनता का जीवन भी बाधित न हो।

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