रुआम औद्योगिक क्षेत्र में विधायक का निरीक्षण सिर्फ खानापूर्ति, 22 में से कई फैक्ट्रियां नहीं खुली, ग्रामीणों में नाराजगी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
मुसाबनी :जमशेदपुर स्थित उपायुक्त कार्यालय में उपायुक्त से मुलाकात कर मुसाबनी प्रखंड के *मुर्गाघुटू पंचायत अंतर्गत मौजा रुआम में JIADA द्वारा आवंटित भूमि पर स्थापित 22 औद्योगिक इकाइयों* के संबंध में चर्चा की गई। आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि इन इकाइयों का भूमि पूजन तत्कालीन मंत्री एवं विधायक के दिवंगत पिता *स्वर्गीय रामदास सोरेन जी* ने क्षेत्र में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से किया था।
लेकिन जमीनी हकीकत इस सरकारी बयान से बिल्कुल अलग है।
*ग्राउंड रिपोर्ट क्या कहती है? – निरीक्षण पर निरीक्षण, नतीजा शून्य*
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विधायक द्वारा यह *कोई पहला निरीक्षण नहीं है।* इस मुद्दे को लेकर पिछले दो वर्षों में *दो-तीन बार निरीक्षण* हो चुका है। हर बार उपायुक्त से मुलाकात, समीक्षा बैठक की बात और रोजगार के वादे, लेकिन जमीन पर एक भी बंद फैक्ट्री चालू नहीं हुई।
रुआम के ग्रामीणों में इसको लेकर काफी नाराजगी है।
*ग्रामीणों ने क्या कहा – राष्ट्र संवाद ने जानी मन की बात*
– *नाम नहीं छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने कहा -* “विधायक जी खुद सत्ता में हैं। एक विधायक होकर भी अगर वे फैक्ट्री मालिकों पर दबाव डालकर फैक्ट्री नहीं खुलवा सकते तो फिर कौन खुलवाएगा? सिर्फ निरीक्षण करने और फोटो खिंचवाने से क्या होगा?”
– *दूसरे ग्रामीण का आरोप -* “कई फैक्ट्री धारकों ने तो सिर्फ जमीन ले ली है। सालों से जमीन खाली पड़ी है, धूल फांक रही है। न कोई निर्माण, न कोई उत्पादन। अगर उनको चलाना नहीं है तो JIADA को उनकी जमीन की आवंटन रद्द कर किसी दूसरे इच्छुक उद्यमी को दे देनी चाहिए।”
*बड़ा सवाल – पिताजी के सपने अधूरे क्यों?*
विधायक अपने हर भाषण में कहते हैं कि _”हमारा प्रयास है कि स्वर्गीय बाबा रामदास सोरेन जी के औद्योगिक विकास के सपने को साकार करते हुए रुआम को एक विकसित औद्योगिक केंद्र बनाया जाए।”_
लेकिन ग्रामीण सवाल पूछ रहे हैं – जब आपके पिताजी ने भूमि पूजन कर औद्योगिक विकास की नींव रखी थी, तो आज आपके विधायक रहते हुए ही *22 में से अधिकतर इकाइयाँ बंद क्यों पड़ी हैं?* स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलना तो दूर, जो काम कर रहे थे उनकी भी नौकरी चली गई।
*क्या होनी चाहिए कार्रवाई?*
ग्रामीणों की मांग साफ है –
1. जो फैक्ट्री 2 साल से बंद है या जिसने जमीन लेकर भी निर्माण नहीं किया, उसका आवंटन तुरंत रद्द हो।
2. बंद पड़ी फैक्ट्रियों को चालू कराने के लिए विधायक नहीं, बल्कि JIADA और उपायुक्त को फैक्ट्री मालिकों को *नोटिस देकर समय-सीमा* तय करनी चाहिए।
3. स्थानीय युवाओं के लिए 75% रोजगार की अनिवार्यता का सख्ती से पालन हो।

