नई दिल्ली. सोने की कीमतों को लेकर वर्ष 2026 के अंत के लिए एक बड़ा अनुमान सामने आया है. मेटल्स फोकस के मैनेजिंग डायरेक्टर फिलिप न्यूमैन के मुताबिक, इस साल के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. मौजूदा कीमतों के अनुपात को आधार माना जाए तो भारत में सोने का भाव करीब 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है. हालांकि यह एक बाजार अनुमान है और वास्तविक कीमत कई आर्थिक एवं वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी.
23 सितंबर 2026 को दिए गए इस अनुमान के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीदारी इस समय कीमतों को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है. इसके अलावा अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी सोने की मांग को प्रभावित कर सकती हैं.
5000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान
मेटल्स फोकस के मैनेजिंग डायरेक्टर फिलिप न्यूमैन ने अनुमान जताया है कि 2026 के अंत तक सोना 5000 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकता है. उनके मुताबिक यह मौजूदा स्तर की तुलना में करीब 16 प्रतिशत की संभावित बढ़ोतरी होगी.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिलहाल करीब 4311 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है. न्यूमैन के अनुसार, 4300 डॉलर प्रति औंस के आसपास का स्तर सोने के लिए मजबूत समर्थन माना जा सकता है.
उनका आकलन ऐसे समय सामने आया है जब सोना पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है और निवेशकों की नजर केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ब्याज दरों तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बनी हुई है.
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी अहम वजह
सोने की मौजूदा तेजी में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी को महत्वपूर्ण कारक बताया जा रहा है. न्यूमैन के मुताबिक दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी अच्छी रही है और तीसरी तिमाही में भी खरीदारी मजबूत रहने की उम्मीद है.
केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को एक मजबूत आधार मिला है. इससे कीमतों को नीचे आने के बजाय ऊंचे स्तर पर टिके रहने में मदद मिल रही है.
मेटल्स फोकस के आकलन के अनुसार, आने वाले समय में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का रुख सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा.
अमेरिका का बढ़ता कर्ज भी महत्वपूर्ण कारक
सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले दूसरे कारकों में अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता भी शामिल है. फिलिप न्यूमैन के मुताबिक अमेरिकी कर्ज को लेकर बढ़ती चिंता निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होती जा रही है.
ऐसे आर्थिक माहौल में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है. सोने को आमतौर पर आर्थिक और वित्तीय अनिश्चितता के दौर में निवेश के एक विकल्प के रूप में देखा जाता है. हालांकि, कीमतों की दिशा केवल एक कारक से तय नहीं होती और वैश्विक बाजार की अन्य परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं.
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कितना असर
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की नजर बनी हुई है. न्यूमैन के अनुसार, हाल में ब्याज दरों में बढ़ोतरी और इस साल एक और बढ़ोतरी की संभावित उम्मीद के बावजूद सोने पर बहुत ज्यादा दबाव आने की संभावना नहीं है.
उनका कहना है कि बाजार संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के प्रभाव को काफी हद तक पहले ही कीमतों में शामिल कर चुका है. यही वजह है कि उनके आकलन में ब्याज दरों में संभावित बदलाव के बावजूद सोने की कीमतों के लिए बड़ा नकारात्मक दबाव दिखाई नहीं देता.
भारत में 1.75 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान
भारत में भी सोने की कीमत पहले ही रिकॉर्ड ऊंचे स्तरों के आसपास बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोना करीब 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है.
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचता है और मौजूदा कीमतों का अनुपात समान रहता है, तो भारत में कीमत करीब 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है.
इस हिसाब से मौजूदा स्तर की तुलना में करीब 24 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की संभावित तेजी बनती है. हालांकि यह सीधा मूल्य-पूर्वानुमान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कीमत और मौजूदा भारतीय भाव के अनुपात पर आधारित अनुमान है. वास्तविक घरेलू कीमत पर रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क, स्थानीय मांग और बाजार की परिस्थितियों का असर पड़ सकता है.
त्योहारी सीजन में बढ़ सकती है सोने की मांग
भारत में आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन को भी सोने की मांग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. त्योहारों और विवाह समारोहों के दौरान आभूषणों की खरीद बढ़ने की संभावना रहती है.
हालांकि, मौजूदा ऊंची कीमतों के कारण ग्राहक खरीदारी को लेकर सतर्क हैं. मेटल्स फोकस के अनुसार, ग्राहक अपने सोने के ऑर्डर पूरी तरह रद्द नहीं कर रहे हैं, बल्कि कुछ मामलों में खरीदारी को आगे के लिए टाल रहे हैं.
इसे भविष्य की मांग के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है. यदि कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आती और त्योहारी मांग बनी रहती है तो घरेलू बाजार में सोने की खरीदारी को समर्थन मिल सकता है.
ऊंची कीमतों के बावजूद मांग पर नजर
सोने की कीमतों के ऊंचे स्तर ने खरीदारों के सामने एक अलग स्थिति पैदा की है. एक ओर त्योहारी और शादी के मौसम में खरीदारी की पारंपरिक मांग है, वहीं दूसरी ओर ऊंची कीमतें ग्राहकों को खरीदारी टालने के लिए प्रेरित कर सकती हैं.
ऐसे में आने वाले महीनों में मांग का वास्तविक स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि कीमतें किस स्तर पर बनी रहती हैं और ग्राहक ऊंचे भाव को किस तरह स्वीकार करते हैं.
चांदी पर भी तेजी का अनुमान
मेटल्स फोकस के आकलन में केवल सोने को लेकर ही तेजी का अनुमान नहीं है. फिलिप न्यूमैन के मुताबिक, यदि सोना 5000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचता है तो चांदी की कीमत भी 80 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है.
उन्होंने वर्ष 2027 में चांदी में और तेजी की गुंजाइश का भी उल्लेख किया है. इससे कीमती धातुओं के बाजार में सोने के साथ चांदी पर भी निवेशकों की नजर बनी रह सकती है.
अनुमान है, गारंटी नहीं
सोने की कीमत को लेकर 1.75 लाख रुपये का आंकड़ा फिलहाल एक बाजार अनुमान है. इसे निश्चित भविष्य की कीमत नहीं माना जा सकता. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की स्थिति, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की धारणा जैसे कई कारक प्रभाव डाल सकते हैं.
भारत में इसके अलावा रुपये की विनिमय दर, आयात संबंधी लागत, स्थानीय मांग और घरेलू बाजार के प्रीमियम का भी असर पड़ता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5000 डॉलर प्रति औंस का स्तर पहुंचने की स्थिति में भी भारतीय बाजार में वास्तविक कीमत अलग हो सकती है.
फिलहाल मेटल्स फोकस का अनुमान सोने के लिए 5000 डॉलर प्रति औंस और भारत में मौजूदा अनुपात के आधार पर करीब 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के संभावित स्तर की ओर संकेत करता है. आने वाला त्योहारी सीजन, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि सोना इस अनुमानित स्तर की दिशा में कितना आगे बढ़ता है.

