Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने कप्तानी में दिखाया कमाल, आखिरी तीन सेकंड में लिया फैसला और पलट गया मैच
    Breaking News Headlines

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने कप्तानी में दिखाया कमाल, आखिरी तीन सेकंड में लिया फैसला और पलट गया मैच

    News DeskBy News DeskAugust 31, 2026No Comments6 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    बेंगलुरु. उम्र महज 15 साल, सामने दलीप ट्रॉफी का सेमीफाइनल और अचानक टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी. ऐसी स्थिति में किसी युवा खिलाड़ी पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने रविवार को अपने फैसले से यह दिखा दिया कि मैदान पर नेतृत्व का आत्मविश्वास उम्र का मोहताज नहीं होता. ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच बेंगलुरु में खेले जा रहे मुकाबले में वैभव ने नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होकर मैदान से बाहर जाने के बाद कमान संभाली और कुछ ही देर में ऐसा निर्णय लिया, जिसने उनकी कप्तानी को चर्चा में ला दिया.

    मुकाबले के दौरान सबसे रोमांचक क्षण 40वें ओवर में आया. सेंट्रल जोन के बल्लेबाज आर्यन जुयाल 46 रन बनाकर अच्छी स्थिति में थे. तेज गेंदबाज मुकेश कुमार की गेंद पर ईस्ट जोन के खिलाड़ियों ने कैच के पीछे होने की जोरदार अपील की, लेकिन मैदानी अंपायर ने अपील खारिज कर दी. इसके बाद गेंदबाज मुकेश कुमार ने वैभव की ओर देखा और उन्हें संकेत दिया कि गेंद बल्ले का किनारा लेकर गई हो सकती है. वैभव खुद भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे.

    यही वह क्षण था जहां युवा कप्तान की असली परीक्षा हुई. अपील के बाद समीक्षा लेने के लिए बहुत कम समय बचा था. वैभव ने संदेह के बावजूद समीक्षा का फैसला किया. बताया गया कि समीक्षा लेने के समय केवल करीब तीन सेकंड शेष थे. इसके बाद तकनीकी जांच में गेंद के बल्ले से गुजरते समय अल्ट्राएज पर हल्का उभार दिखाई दिया. मैदानी निर्णय बदलना पड़ा और आर्यन जुयाल को आउट करार दिया गया. वैभव का फैसला सही साबित होते ही उनकी खुशी देखने लायक थी. उन्होंने साथियों के साथ इस सफलता का जश्न मनाया.

    इस एक फैसले ने वैभव की भूमिका को अचानक बदल दिया. कुछ समय पहले तक वह टीम के उपकप्तान के तौर पर मैदान में थे, लेकिन ईशान किशन की चोट के बाद उन्हें वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच नेतृत्व करना पड़ा. ईशान को दाहिने हाथ की उंगली में चोट लगने के बाद मैदान छोड़ना पड़ा था. वैभव को उपकप्तान बनाया गया था और नियमित कप्तान की अनुपस्थिति में उन्होंने लगभग 20 ओवर तक टीम की कमान संभाली.

    वैभव के लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दलीप ट्रॉफी घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट का बड़ा मंच है. यहां उन्हें ऐसे खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिल रहा है, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट का लंबा अनुभव है. ऐसे माहौल में अचानक कप्तानी संभालना और फिर गेंदबाज की अपील तथा अपनी शंका के बीच सही फैसला करना उनके क्रिकेटिंग नजरिए की ओर इशारा करता है.

    दिलचस्प बात यह है कि वैभव का दिन केवल कप्तानी के कारण खास नहीं रहा. इससे पहले भी उन्होंने गेंद से प्रभाव छोड़ा है. क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ उनका बल्ले से प्रदर्शन साधारण रहा था और वह केवल आठ रन बना सके थे, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने एक ओवर में दो विकेट लेकर टीम को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई थी. ईस्ट जोन ने वह मुकाबला एक पारी और 210 रन से जीता था और इसी जीत के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश किया था.

    सेमीफाइनल में भी उनके सामने चुनौती कम नहीं थी. सेंट्रल जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 200 रन का आंकड़ा पार कर लिया था और रिंकू सिंह ने अर्धशतक लगाकर पारी को मजबूती दी. रिंकू ने सरांश जैन के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी भी की. सेंट्रल जोन के बल्लेबाजों ने ईस्ट जोन के गेंदबाजों के सामने धैर्य दिखाया, लेकिन जुयाल के विकेट ने पारी के उस चरण में ईस्ट जोन को जरूरी सफलता दिलाई.

    वैभव के कप्तानी वाले इस छोटे से दौर की खासियत यह रही कि उन्हें लंबे समय तक रणनीति बनाने का अवसर नहीं मिला. कप्तानी अचानक मिली और मैदान पर तुरंत निर्णय लेने पड़े. ऐसी स्थिति में समीक्षा का फैसला लेना भी आसान नहीं था, क्योंकि यदि समीक्षा गलत साबित होती तो टीम का एक मौका खत्म हो जाता. लेकिन वैभव ने गेंदबाज के भरोसे, फील्डिंग पोजीशन से मिली जानकारी और अपनी समझ को मिलाकर जोखिम उठाया. परिणाम उनके पक्ष में रहा.

    इस घटना ने वैभव के क्रिकेट करियर में एक और नया अध्याय जोड़ दिया है. पिछले कुछ महीनों में उनका नाम लगातार तेजी से उभरते भारतीय क्रिकेटरों में लिया जा रहा है. आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए उनके प्रदर्शन ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई. इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में भी उन्होंने दो अर्धशतक लगाए और अपनी बल्लेबाजी क्षमता का परिचय दिया.

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत हालांकि उनके लिए आसान नहीं रही थी. इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के बाद शुरुआती मैचों में वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए. लेकिन जिम्बाब्वे में उन्होंने वापसी करते हुए बेहतर प्रदर्शन किया. इसके बाद दलीप ट्रॉफी में उपकप्तानी की जिम्मेदारी मिलना उनके विकास के अगले चरण के रूप में देखा गया. अब कप्तानी में मिला यह अवसर उनकी भूमिका को और व्यापक कर सकता है.

    वैभव की सबसे बड़ी उपलब्धि इस समय केवल रन या विकेट नहीं है, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को ढालना भी है. बल्लेबाज के रूप में तेजतर्रार क्रिकेट के लिए पहचाने जाने वाले इस युवा खिलाड़ी ने गेंद से भी उपयोगी योगदान दिया है और अब कप्तानी के दौरान निर्णय लेने की क्षमता का नमूना पेश किया है. दलीप ट्रॉफी जैसे प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में यह पहलू उनके खेल को और परिपक्व बनाने में मदद कर सकता है.

    ईस्ट जोन के लिए वैभव का सफल समीक्षा फैसला उस समय आया जब टीम को एक महत्वपूर्ण विकेट की जरूरत थी. आर्यन जुयाल 46 रन पर खेल रहे थे और सेंट्रल जोन अपनी पारी को आगे बढ़ाने की स्थिति में था. विकेट गिरने के बाद ईस्ट जोन को राहत मिली और वैभव के चेहरे पर आई खुशी ने इस क्षण की अहमियत को साफ कर दिया.

    यह घटना भारतीय घरेलू क्रिकेट में वैभव के बढ़ते कद की एक और झलक भी है. उपकप्तान के रूप में चुने जाने के बाद उनकी नेतृत्व क्षमता को लेकर सवाल उठे थे, क्योंकि टीम में उनसे कहीं अधिक अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं. लेकिन चयनकर्ताओं ने इसे उनके विकास की प्रक्रिया का हिस्सा माना था. कप्तानी का यह अवसर और शुरुआती सफलता उस भरोसे को मजबूत करती दिखाई दे रही है.

    हालांकि एक सफल समीक्षा को किसी खिलाड़ी की कप्तानी क्षमता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन दबाव के क्षण में निर्णय लेने का तरीका जरूर महत्वपूर्ण होता है. वैभव ने संदेह के बावजूद जोखिम उठाया और तकनीकी जांच ने उनके फैसले को सही साबित कर दिया. यही वह छोटी-सी घटना है जिसने दलीप ट्रॉफी के मुकाबले में 15 वर्षीय खिलाड़ी को अचानक सुर्खियों में ला दिया.

    मैदान पर उम्र भले ही 15 साल की हो, लेकिन उस कुछ सेकंड के फैसले में वैभव सूर्यवंशी ने दिखा दिया कि बड़े मुकाबलों में जिम्मेदारी मिलने पर वह पीछे हटने वाले नहीं हैं. ईशान किशन की चोट से मिली अचानक कप्तानी, तीन सेकंड शेष रहते समीक्षा का फैसला और उसके सही साबित होने के बाद उत्साह—दलीप ट्रॉफी का यह पल उनके क्रिकेट सफर में लंबे समय तक याद किया जा सकता है.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleयूपी में दर्दनाक हादसा : तेज रफ्तार थार पलटी, हादसे में 4 युवकों की मौत, 17 वर्षीय युवक घायल
    Next Article झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज, तीन दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट

    Related Posts

    दिल्ली के फैशन मंच पर चमकी जमशेदपुर की मंदीप कौर, ‘ब्रांड मास्टर’ से सम्मानित

    August 31, 2026

    ‘साझी शहादत-साझी विरासत’ सेमिनार की तैयारियों की समीक्षा

    August 31, 2026

    JPSC-JSSC कथित धांधली के विरोध में आजसू छात्र संघ ने मांगी आंदोलन की अनुमति

    August 31, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    दिल्ली के फैशन मंच पर चमकी जमशेदपुर की मंदीप कौर, ‘ब्रांड मास्टर’ से सम्मानित

    ‘साझी शहादत-साझी विरासत’ सेमिनार की तैयारियों की समीक्षा

    JPSC-JSSC कथित धांधली के विरोध में आजसू छात्र संघ ने मांगी आंदोलन की अनुमति

    दलमा में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस की मुहिम तेज, छह वांछित उग्रवादियों के पोस्टर जारी

    झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज, तीन दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने कप्तानी में दिखाया कमाल, आखिरी तीन सेकंड में लिया फैसला और पलट गया मैच

    यूपी में दर्दनाक हादसा : तेज रफ्तार थार पलटी, हादसे में 4 युवकों की मौत, 17 वर्षीय युवक घायल

    नेपाल : बाढ़ में डूबे बैंक से 50 करोड़ का सोना और डेढ़ करोड़ कैश बरामद, 903 मौतें, 4200 से अधिक लापता

    सुप्रीम कोर्ट ने ई-20 पेट्रोल को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, कहा- आप हाई कोर्ट जाएं

    खरकई का जलस्तर खतरे के पार, निचले इलाकों में बढ़ी चिंता; स्वर्णरेखा पर भी नजर

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.