लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को जमशेदपुर में भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया और उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) भारत के 40 से अधिक किसान संगठनों का एक व्यापक गठबंधन है, जिसने वर्ष 2020-21 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व किया था। उस आंदोलन की सफलता के बाद भी मोर्चा कृषि नीतियों पर निरंतर निगरानी रखता है। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में किया गया यह प्रदर्शन ग्रामीण भारत की उस गहरी चिंता को दर्शाता है जो मुक्त व्यापार समझौतों के कृषि अध्याय को लेकर बनी हुई है। उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपना इस बात का प्रतीक है कि किसान अपनी मांगों को संवैधानिक सर्वोच्च प्राधिकारी तक पहुंचाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कृषि मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता द्विपक्षीय वाणिज्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लंबे समय से बातचीत के दौर में है, जिसका वार्षिक व्यापार पहले ही 190 बिलियन डॉलर को पार कर चुका है। हालांकि, कृषि बाजार पहुंच एक प्रमुख विवाद का विषय बनी हुई है। अमेरिकी कृषि व्यवस्था विशाल औद्योगिक फार्मों, उन्नत प्रौद्योगिकी और वार्षिक 20 बिलियन डॉलर से अधिक की संघीय सब्सिडी द्वारा समर्थित है, जो इसे भारत के छोटे जोत वाले किसानों पर निर्णायक बढ़त देती है। भारत में 86 प्रतिशत से अधिक किसान दो हेक्टेयर से कम भूमि पर खेती करते हैं और पहले से ही बढ़ती इनपुट लागत, कर्ज और फसलों के लाभकारी मूल्य न मिलने के संकट से जूझ रहे हैं। एसकेएम के ज्ञापन में विशेष रूप से गेहूं, चावल, मक्का, दालें, सोयाबीन, डेयरी, फल, सूखे मेवे, कपास और पोल्ट्री जैसे उन क्षेत्रों का उल्लेख है जिनसे करोड़ों किसानों की आजीविका जुड़ी है। इन वस्तुओं पर आयात शुल्क में कटौती घरेलू मंडियों में कीमतों को धराशायी कर सकती है, जिससे सीमांत उत्पादकों के लिए खेती अलाभकारी हो जाएगी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने रखी ये प्रमुख मांगें
जमशेदपुर: भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), पूर्वी सिंहभूम की ओर से बुधवार को उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने आरोप लगाया कि यह समझौता किसान, मजदूर और आम जनता के हितों के खिलाफ है तथा इसके लागू होने से देश की कृषि व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा ने ज्ञापन में कहा कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कटौती या उसे समाप्त किए जाने की तैयारी है। संगठन का कहना है कि इससे अमेरिकी गेहूं, चावल, मक्का, दालें, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, फल, सूखे मेवे, कपास और पोल्ट्री उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे देश के किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल सकेगा।
मोर्चा ने कहा कि अमेरिका और भारत की कृषि व्यवस्था की तुलना नहीं की जा सकती। अमेरिका में केवल दो प्रतिशत आबादी कृषि कार्य से जुड़ी है और वहां किसानों को सरकार की ओर से भारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जो पहले से ही बढ़ती लागत, कर्ज और फसलों के कम दाम की समस्या से जूझ रहे हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि वर्तमान नीतियों के कारण खाद, बीज, डीजल और कीटनाशकों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है। ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने से भारतीय किसान आर्थिक रूप से और कमजोर हो जाएंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति से मांग की कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पुनर्विचार किया जाए तथा किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए इस समझौते को लागू नहीं किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी की तो देशभर में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
आगामी रणनीति और देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
एसकेएम नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि केंद्र सरकार इस ज्ञापन पर संज्ञान लेकर व्यापार समझौते के कृषि प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। यह रणनीति 2020-21 के आंदोलन के समान ही है, जिसमें कानूनी याचिकाओं, जिला स्तरीय प्रदर्शनों और बड़े पैमाने पर लामबंदी को मिलाकर दबाव बनाया गया था। किसान नेताओं ने संकेत दिया है कि अगले चरण में प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में रेल रोको और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह या तो व्यापार समझौते के कृषि अध्याय पर पुनर्वार्ता करे या देश के सबसे संगठित किसान आंदोलन के साथ एक और लंबे टकराव का सामना करने के लिए तैयार रहे। इस संगठन के इतिहास और गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया पर संयुक्त किसान मोर्चा देखें। [INTERNAL_LINK_HOLDER]

