लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
स्पा सेंटरों की सच्चाई
इंद्र यादव/मुंबई/ठाणे शहर में ‘वेलनेस’ और ‘रिलैक्सेशन’ के नाम पर चलने वाले स्पा सेंटरों की सच्चाई अक्सर कुछ और ही होती है। इसका ताजा सबूत मिला है ठाणे के कासारवडवली इलाके में, जहाँ पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल (AHTC) ने स्पा सेंटरों में काम करने वाली युवतियों को देहव्यापार के धंधे में धकेलने वाली एक महिला एजेंट का भंडाफोड़ किया है।
यह धंधा किसी फिल्म की कहानी की तरह नहीं, बल्कि एक बेहद घटिया ‘बिजनेस मॉडल’ की तरह चल रहा था। आरोप है कि यह महिला एजेंट बाकायदा ग्राहकों को स्पा में काम करने वाली लड़कियों की फोटो भेजती थी और फिर मोटी रकम लेकर उन्हें ‘सप्लाई’ करती थी। पिछले कई महीनों से यह गंदा खेल बेखौफ चल रहा था, लेकिन ठाणे क्राइम ब्रांच की नजरें इस पर टिकी थीं।
जब क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली कि आनंद नगर, विजय गार्डन रोड स्थित शंभू जी होटल के पास यह महिला एजेंट एक और ‘डील’ को अंजाम देने वाली है, तो पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया। पुलिस ने खुद अपना ‘बोगस ग्राहक’ तैयार कर मौके पर भेजा। जैसे ही सौदा पक्का हुआ, पुलिस ने छापा मारकर इस महिला एजेंट को रंगे हाथों दबोच लिया। मौके से दो पीड़ित युवतियों को इस दलदल से रेस्क्यू किया गया, जिनकी जिंदगी इस ‘एजेंट’ ने नरक बना रखी!
फिलहाल, क्राइम ब्रांच ने आरोपी महिला एजेंट को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और PITA (अनैतिक देह व्यापार निवारण) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, जिन दो युवतियों को इस दलदल से निकाला गया है, उन्हें फिलहाल सुरक्षित महिला सुधारगृह भेजा जा रहा है, ताकि वे इस मानसिक और शारीरिक शोषण से उबर सकें।
यह गिरफ्तारी तो एक महिला एजेंट की है, लेकिन सवाल बड़े हैं। क्या सिर्फ यह एक महिला ही इस पूरे नेटवर्क को चला रही थी? या फिर शहर के अन्य स्पा सेंटरों की आड़ में भी ऐसे ही शर्मनाक धंधे फल-फूल रहे हैं? ठाणे पुलिस की इस कार्रवाई ने उन तमाम दलालों के कान जरूर खड़े कर दिए हैं, जो मासूम लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी जेबें भर रहे हैं।
ठाणे क्राइम ब्रांच की इस टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जिस मुस्तैदी से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है, वह यह साफ संदेश देता है कि ठाणे शहर में ‘जिस्म का व्यापार’ अब और नहीं चलेगा।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
गिरफ्तार महिला एजेंट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम (PITA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है, जिसमें स्पा सेंटर के मालिक और ग्राहक शामिल हो सकते हैं। ठाणे क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के ऑपरेशन आगे भी जारी रहेंगे। स्पा सेंटरों की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस कॉल डेटिल रिकॉर्ड (CDR) और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर रही है।
समाज पर प्रभाव और जागरूकता की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने उस कड़वी सच्चाई को उजागर किया है जहां ‘वेलनेस’ और ‘रिलैक्सेशन’ के नाम पर मासूम जिंदगियों को अंधेरे में धकेला जाता है। गैर-सरकारी संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि स्पा सेंटरों के लाइसेंस और निगरानी तंत्र को और सख्त बनाया जाए। साथ ही, पीड़ित युवतियों के पुनर्वास के लिए समुचित काउंसलिंग और कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। अधिक जानकारी के लिए UNODC मानव तस्करी रिपोर्ट देखें।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिला एजेंट लंबे समय से इस रैकेट का संचालन कर रही थी और उसके संपर्क कई हाई-प्रोफाइल ग्राहकों से भी थे। जांच टीम अब कॉल डेटिल रिकॉर्ड (CDR) और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। ठाणे पुलिस आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी स्पा सेंटर में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो वे तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 या एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल से संपर्क करें। इस मामले ने स्पा और वेलनेस इंडस्ट्री के नियमन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र सरकार पहले ही स्पा सेंटरों के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी कर चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन कितना हो रहा है, यह इस छापेमारी से स्पष्ट होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छापेमारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि निरंतर निगरानी, औचक निरीक्षण और स्पा मालिकों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।

