लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
जमशेदपुर: शहर के निवासी जय किशोर सिंह एसएसपी से मिले बुधवार को, उन्होंने वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मुलाकात कर अपनी सुरक्षा और लंबित आपराधिक मामले में कार्रवाई की मांग की। यह घटनाक्रम शहर में न्याय और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। एसएसपी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने पुलिस प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा और आरोप लगाया कि उनके साथ हुई गंभीर घटनाओं के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पीड़ित परिवार में भय का माहौल है।
जानलेवा हमला और पुलिस की निष्क्रियता
11 फरवरी का हमला: जय किशोर सिंह एसएसपी से मिले
जय किशोर सिंह ने विस्तार से बताया कि कैसे 11 फरवरी को पार्किंग गेट के पास उनके साथ कथित रूप से लाठी-डंडों से हमला किया गया था। इस बर्बर हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसने उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला। उन्होंने इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला (अटेम्प्ट टू मर्डर) का मामला दर्ज कराया था, जो भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत आता है। उनका आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के कई महीने बीत जाने के बावजूद, पुलिस ने अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है। यह स्थिति पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।
जहर देकर मारने की साजिश और लगातार मिल रही धमकियां
यह केवल एक घटना नहीं है; जय किशोर सिंह ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2023 में भी उन्हें जहर देकर मारने की साजिश रची गई थी। यह आरोप बेहद संगीन है और दिखाता है कि हमलावर कितनी हद तक जा सकते हैं। उस मामले को भी उन्होंने पुलिस के समक्ष उठाया था, लेकिन उसमें भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हुए होंगे। जय किशोर सिंह का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उन्हें और उनके परिवार को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। एक नागरिक के रूप में, अपने घर में सुरक्षित महसूस न करना बेहद दुखद और अस्वीकार्य है। यह कानून-व्यवस्था पर सीधा सवाल है।
प्रभावशाली आरोपी और न्याय की राह में बाधाएं
जय किशोर सिंह ने आरोप लगाया कि मामले के सभी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार उनके घर पहुंचकर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। यह पीड़ितों को धमकाने और न्याय से वंचित करने का एक सीधा प्रयास है। उन्होंने कहा कि आरोपियों द्वारा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी जा रही है। उनका सबसे गंभीर आरोप यह है कि आरोपी आर्थिक रूप से बेहद प्रभावशाली और बड़े पूंजीपति हैं, जिन्होंने पुलिस अधिकारियों को प्रभावित कर रखा है। इसी कारण पुलिस उनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है। यह स्थिति तब और भी जटिल हो जाती है जब प्रभावशाली व्यक्ति न्याय प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास करते हैं। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि क्या कानून सभी के लिए समान है।
एसएसपी से सीधी अपील: निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग
एसएसपी से मुलाकात के दौरान, जय किशोर सिंह ने निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने पुलिस प्रशासन से त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे न्याय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू करने को मजबूर होंगे। यह उनकी अंतिम आशा और नागरिक अधिकार के तहत उठाया गया कदम होगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के जान-माल के खतरे से बचाया जा सके। भारत में नागरिकों को न्याय और सुरक्षा का अधिकार है। अधिक जानकारी के लिए, आप राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की वेबसाइट देख सकते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
न्याय की पुकार: आगे क्या?
जय किशोर सिंह एसएसपी से मिले यह दर्शाता है कि एक आम नागरिक के लिए न्याय की लड़ाई कितनी कठिन हो सकती है, खासकर जब प्रभावशाली लोग इसमें शामिल हों। पुलिस की भूमिका यहाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें न केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना है, बल्कि पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। इस मामले में पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी होंगी। क्या जमशेदपुर पुलिस इस मामले में निष्पक्षता और कानून के शासन को बनाए रखेगी? यह समय ही बताएगा।

