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    Home » यूसील में गहराया तनाव: डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली पर राष्ट्रीय स्तर तक सवाल
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    यूसील में गहराया तनाव: डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली पर राष्ट्रीय स्तर तक सवाल

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 5, 2026No Comments3 Mins Read
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    डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    देश के सबसे बड़े यूरेनियम उत्पादक उपक्रम यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी यूसील के जादूगोड़ा इकाई में इन दिनों प्रबंधन और कर्मियों के बीच तनाव गहराता जा रहा है। इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली। यूनियन नेताओं से लेकर विस्थापित परिवारों तक सभी राकेश कुमार के रवैये से नाराज हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि इसकी शिकायत अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है।

    डेढ़ महीने से ठप संवाद: डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली बढ़ा रही औद्योगिक अशांति

    यूनियन सूत्रों के अनुसार डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार ने पिछले डेढ़ महीने से यूनियन नेताओं के साथ किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं की है। कर्मचारियों की समस्याओं, वेतन, प्रमोशन और अन्य लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए यूनियन बार-बार समय मांग रही है, लेकिन पर्सनल विभाग से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा।

    यूनियन नेताओं का कहना है कि इस हठधर्मिता के कारण यूसील में औद्योगिक अशांति का माहौल बन गया है। “जब संवाद ही बंद हो जाएगा तो समस्या का समाधान कैसे होगा? डीजीएम पर्सनल की यह कार्यशैली सीधे-सीधे श्रम कानूनों का उल्लंघन है,” एक वरिष्ठ यूनियन पदाधिकारी ने कहा। औद्योगिक संबंधों के महत्व को समझने के लिए भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की वेबसाइट देखी जा सकती है: श्रम और रोजगार मंत्रालय।

    विस्थापितों में गुस्सा और जर्जर कॉलोनी: यूसील प्रबंधन पर सवाल

    डीजीएम पर्सनल की कार्यशैली से सिर्फ यूनियन ही नहीं, बल्कि यूसील के विस्थापित परिवार भी नाराज हैं। विस्थापितों का आरोप है कि पुनर्वास, मुआवजा और अन्य सुविधाओं से जुड़े मामलों में पर्सनल विभाग पूरी तरह उदासीन है। महीनों से फाइलें पर्सनल ऑफिस में धूल फांक रही हैं।

    इतना ही नहीं, यूसील कॉलोनी की स्थिति भी बद से बदतर हो गई है। सड़क, नाली, पानी और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं चरमरा गई हैं। यूनियन नेताओं का आरोप है कि डीजीएम पर्सनल कॉलोनी की समस्याओं को सुनने तक के लिए तैयार नहीं हैं। “पर्सनल अधिकारी अपना मूल कार्य ही नहीं निभा पा रहे हैं। कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुविधापूर्ण जीवन देना तो दूर, बुनियादी समस्याएं भी हल नहीं हो रही हैं,” यूनियन ने कहा।

    राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची यूसील प्रबंधन की शिकायत

    यूनियन नेताओं और विस्थापित संघ ने अब मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच सेतु का काम करने वाला पर्सनल विभाग ही अगर संवाद बंद कर दे, तो औद्योगिक माहौल कैसे सुधरेगा?

    शिकायत में मांग की गई है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और यूसील प्रबंधन तत्काल हस्तक्षेप कर डीजीएम पर्सनल को संवाद बहाल करने का निर्देश दे।

    यूसील प्रबंधन की चुप्पी और भविष्य का आंदोलन

    एक तरफ यूसील देश की परमाणु ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही कर्मचारियों और विस्थापितों की समस्याओं के समाधान में प्रबंधन विफल दिख रहा है। यूनियन का कहना है कि अगर अगले एक सप्ताह में वार्ता शुरू नहीं हुई और कॉलोनी विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं निकला, तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।

    फिलहाल डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली को लेकर उठ रहे सवालों ने यूसील प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर हुई शिकायत के बाद प्रबंधन क्या कदम उठाता है। एक महिला कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार करने का मामला भी काफी चर्चा में रहा।

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    औद्योगिक अशांति कर्मचारी संघ जादूगोड़ा यूसील विस्थापित परिवार
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