राष्ट्र संवाद संवाददाता
भारत के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ मानी जाने वाली यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) को आखिरकार नया तकनीकी निदेशक मिल गया। लोक उद्यम चयन बोर्ड (PESB) ने 22 जून 2026 को हुई 51/2026वीं बैठक में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) के महाप्रबंधक (माइंस) _सलिल कुमार नाग_ के नाम पर मुहर लगा दी। यह पद पिछले एक साल से खाली था और सी एम डी डॉ. कंचन आनंद राव अतिरिक्त प्रभार देख रहे थे।
कौन हैं सलिल कुमार नाग? पूरा प्रोफाइल*
_1. मौजूदा जिम्मेदारी_: HCL, कॉर्पोरेट ऑफिस कोलकाता में GM (माइंस)। हाल ही में DGM से प्रमोट होकर GM बने।
_2. अनुभव का दायरा_: HCL खान मंत्रालय के तहत मिनीरत्न PSU है। देश में तांबे के खनन, उत्पादन और विपणन की एकमात्र कंपनी। इसकी खदानें मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र और गुजरात में फैली हैं।
_3. पुराना ट्रैक रिकॉर्ड_: BHEL की त्रिची यूनिट में महाप्रबंधक रहते हुए 11 महीने में उत्पादन 22% बढ़ाया था। माइनिंग सेक्टर में 28 साल से ज्यादा का फील्ड और प्लानिंग अनुभव।
_4. शैक्षणिक योग्यता_: माइनिंग इंजीनियरिंग में http://B.Tech और मैनेजमेंट में PGDM। बड़े PSU में 5 साल से अधिक का सीनियर लेवल अनुभव।
*चयन प्रक्रिया: 4-4 GM को पीछे छोड़ा*
PESB इंटरव्यू में कुल 10 सीनियर अफसर बुलाए गए थे:
– _UCIL से_: 4 महाप्रबंधक
– _HCL से_: 2 महाप्रबंधक, जिनमें नाग शामिल
– _MOIL से_: 1 मुख्य महाप्रबंधक
– _NLC इंडिया से_: 2 ED/CGM स्तर के अधिकारी
– _परमाणु ऊर्जा विभाग से_: 1 टेक्निकल ऑफिसर
नाग ने HCL के ही GM रविंद्र घाटूवार समेत UCIL के चारों GM को पछाड़कर यह पद हासिल किया।
*पद की अहमियत: क्यों है सबसे मुश्किल कुर्सी?*
_1. बोर्ड स्तर का पद_: वेतनमान _₹1,60,000 – ₹2,90,000 प्रति माह_ (IDA)। कार्यकाल 5 साल या 60 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो।
_2. सीधी जिम्मेदारी_: देश के सभी यूरेनियम खनन और प्रोसेसिंग प्लांट्स का संचालन। न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल की तकनीकी रणनीति बनाना।
_3. सामरिक महत्व_: UCIL परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत देश की एकमात्र यूरेनियम खनन कंपनी है। भारत के सभी परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन की आपूर्ति इसी पर निर्भर है।
कुर्सी संभालते ही 3 बड़े मोर्चे: नाग के सामने चुनौतियों का अंबार
1. भ्रष्टाचार का दीमक: 18% महंगी खरीद का आरोप
पिछले तीन साल से UCIL में खरीद और ठेका आवंटन में गड़बड़ी की शिकायतें CVC तक पहुंची हैं। सूत्रों के मुताबिक कच्चे माल की खरीद बाजार दर से 18% तक महंगी की गई। स्पेयर पार्ट्स के टेंडर में भी चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप हैं। विजिलेंस की शुरुआती जांच में कई GM और DGM स्तर के अफसरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
2. उत्पादन 40% ठप: 3 में से 2 यूनिट आधी क्षमता पर
2025-26 की Q1 में UCIL उत्पादन लक्ष्य से 40% पीछे रह गई। जादूगोड़ा, तुम्मालापल्ले और नरवा पहाड़ माइंस में मशीनें बार-बार ब्रेकडाउन हो रही हैं। स्पेयर पार्ट्स 8-10 महीने लेट आ रहे हैं। मेंटेनेंस बजट का 60% लैप्स हो चुका है।
3. HR क्राइसिस: 340 पद खाली, प्रमोशन अटके
UCIL में इंजीनियर से लेकर माइनिंग सरदार तक के 340 पद सालों से खाली हैं। प्रमोशन पॉलिसी 2019 के बाद रिवाइज नहीं हुई, जिससे जूनियर इंजीनियरों में भारी असंतोष है। कंपनी अभी भी मैनुअल क्वालिटी चेक पर निर्भर है, जबकि निजी कंपनियां AI-बेस्ड ग्रेड एनालिसिस पर शिफ्ट हो चुकी हैं।
क्या बोले कर्मचारी और एक्सपर्ट?
_UCIL संयुक्त यूनियन का कहना हे कि “नए साहब से उम्मीद है। BHEL वाला रिकॉर्ड सुना है। लेकिन 2 महीने में भ्रष्ट अफसरों पर गाज नहीं गिरी तो गेट मीटिंग तय है।”
_परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. अजय लेले_: “यूरेनियम उत्पादन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। नाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शिता लाना और मोरल बूस्ट करना है। तकनीक से ज्यादा सिस्टम ठीक करना होगा।”
अगला कदम क्या?
PESB की सिफारिश के बाद फाइल अब परमाणु ऊर्जा विभाग और फिर ACC के पास जाएगी। मंजूरी मिलते ही नियुक्ति आदेश जारी होगा। तब तक नाग HCL में ही GM (माइंस) बने रहेंगे।
1968 में स्थापित UCIL झारखंड के जादूगोड़ा में देश की पहली यूरेनियम माइन चलाती है। आंध्र प्रदेश, मेघालय और कर्नाटक में भी इसके प्लांट हैं।

