प्रख्यात शायर बशीर बद्र को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
राष्ट्र संवाद संवादाता
बशीर बद्र हर वर्ग के पाठकों का पसंदीदा शायर रहा है: साहिर
राजिम, छ. ग। बशीर बद्र के निधन पर रत्नांचल जिला साहित्य एवं जनकल्याण समिति द्वारा एक भावपूर्ण साहित्यिक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारियों, साहित्यकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके साहित्यिक योगदान को याद किया
सभा को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष शायर जितेन्द्र सुकुमार ‘साहिर’ ने कहा कि बशीर बद्र की शायरी आम इंसान की भावनाओं, रिश्तों और जीवन के अनुभवों को बेहद सहज एवं प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि उनकी ग़ज़लें केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाइयों का आईना हैं।उन्होंने बशीर बद्र के चर्चित शेर “कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी, यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शेर आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। इसके साथ ही उन्होंने उनके प्रसिद्ध अशआर “मुसाफ़िर हैं हम भी, मुसाफ़िर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी”,
“हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा” तथा “परखना मत, परखने से कोई अपना नहीं रहता, किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता” का जिक्र करते हुए कहा कि बशीर बद्र ने मोहब्बत, रिश्तों, विश्वास और आत्मसम्मान को अपनी शायरी में अद्भुत संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया।उन्होंने आगे कहा कि बशीर बद्र की रचनाओं ने उर्दू अदब को नई ऊंचाइयाँ प्रदान कीं तथा नई पीढ़ी को ग़ज़ल और साहित्य की ओर आकर्षित किया। कार्यक्रम के दौरान कवयित्री एवं लेखिका सुश्री सरोज कंसारी, गोबरा नवापारा एवं उपस्थित साहित्यकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

