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    Home » बिरसा मुंडा: जनजातीय कला से जीवन गाथा, रांची में कार्यशाला
    झारखंड धर्म शिक्षा

    बिरसा मुंडा: जनजातीय कला से जीवन गाथा, रांची में कार्यशाला

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaMay 18, 2026No Comments2 Mins Read
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    बिरसा मुंडा चित्रकला कार्यशाला
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    बिरसा मुंडा के जीवन पर 10 दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), रांची क्षेत्रीय केंद्र द्वारा डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के सहयोग से भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्ष पर आधारित 10 दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का सोमवार को मोराबादी स्थित संस्थान सभागार में उद्घाटन किया गया। यह कार्यशाला 18 मई से 27 मई 2026 तक आयोजित होगी।

    जनजातीय कला शैलियों से बिरसा मुंडा की गाथा

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक कर्मा जिम्पा भूटिया (आईएफएस) ने कहा कि सोहराय, जादू पटिया, पैतकर और उरांव चित्रकला जैसी पारंपरिक जनजातीय कला शैलियों के माध्यम से बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और समाज पर उनके प्रभाव को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने इसे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की महत्वपूर्ण पहल बताया।

    नई पीढ़ी को आदर्शों से जोड़ने की पहल

    आईजीएनसीए रांची के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कुमार संजय झा ने कहा कि कार्यशाला की कलाकृतियां नई पीढ़ी को बिरसा मुंडा के आदर्शों और विचारों से परिचित कराएंगी। कार्यशाला का क्यूरेशन वरिष्ठ कलाकार सी.आर. हेम्ब्रम ने किया है।

    सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण और पारंपरिक कला

    कार्यशाला में झारखंड के विभिन्न पारंपरिक कलाकार भाग ले रहे हैं, जिनमें पैतकर, जादू पटिया, सोहराय और उरांव चित्रकला से जुड़े कलाकार शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी कला परंपराओं के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा के जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण और पुनर्पाठ करना है। उद्घाटन समारोह में कलाकारों, विद्वानों, विद्यार्थियों और संस्कृति प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

    बिरसा मुंडा चित्रकला कार्यशाला
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