लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं, दो-तिहाई बहुमत से चूकी सरकार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 पर मतदान कराया गया, लेकिन यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट डाले गए। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।
इससे पहले महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक को लेकर सदन में लंबी बहस चली। विपक्षी दलों ने दोनों विधेयकों का लगातार विरोध किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष से बिल के समर्थन की अपील की।
गृह मंत्री अमित शाह ने बहस का जवाब देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि इंडी अलायंस परिसीमन का नहीं, बल्कि मुख्य रूप से महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है। उनके भाषण के बाद सदन में मतदान कराया गया, जिसमें बिल बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका।
महिला आरक्षण से जुड़े इस विधेयक के गिरने के बाद सरकार द्वारा पेश किए गए ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट किया कि जब तक संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होता, उससे जुड़े अन्य विधेयकों पर आगे की प्रक्रिया संभव नहीं है।
सदन में हुई इस घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।

