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    नगर निकाय चुनावी सरगर्मी में कंबलों की राजनीति,आदित्यपुर नगर निगम में गरीबों के हक पर सियासी खेल

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarJanuary 8, 2026No Comments4 Mins Read
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    नगर निकाय चुनावी सरगर्मी में कंबलों की राजनीति,आदित्यपुर नगर निगम में गरीबों के हक पर सियासी खेल

    राष्ट्र संवाद संवाददाता अमन ओझा

    ज्ञात हो कि नगर निकायों का संभावित चुनाव अप्रैल माह में प्रस्तावित है, लेकिन उससे पहले ही नगर निगम क्षेत्रों में कंबल वितरण को लेकर राजनीति गर्मा गई है। सरकार द्वारा आम जनता के हक के तौर पर उपलब्ध कराए गए कंबलों को इन दिनों चुनावी लाभ भुनाने का जरिया बनाया जा रहा है। ठंड में ठिठुरती आम अवाम के बीच कंबल बांटकर बड़े नेक कार्य का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। ताजा मामला आदित्यपुर नगर निगम से जुड़ा है, जहां नियमों के तहत कमिश्नर से लेकर वार्ड पार्षद तक के कोटे में कंबल आवंटित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

    आरोप है कि जिन जरूरतमंदों के नाम बीपीएल कार्ड से जुड़े हैं, उन्हें कंबल देने के बजाय राहत सामग्री किसी और के हाथों सौंप दी जा रही है और फिर इस तथाकथित सेवा कार्य को मीडिया में प्रचारित कराया जा रहा है। नियमानुसार कंबल वितरण की जिम्मेदारी नगर निगम कमिश्नर द्वारा वार्ड पार्षदों को सौंपी जानी चाहिए, लेकिन आदित्यपुर में वर्तमान पार्षदों की भूमिका लगभग शून्य नजर आ रही है। उनके स्थान पर पूर्व और भावी प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ कंबल बांटकर वाहवाही लूटते दिखाई दे रहे हैं।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो आदित्यपुर नगर निगम के विभिन्न वार्डों में लगभग 800 से 1000 बीपीएल कार्डधारी परिवार हैं, लेकिन आरोप है कि केवल 50 से 100 लोगों को ही कंबल देकर वितरण की औपचारिकता पूरी कर ली जाती है। इसके बाद जिन जरूरतमंदों को कंबल नहीं मिल पाता, उनके बीच यह संदेश फैलाया जा रहा है कि ऐसे लोग आगामी चुनाव में वोट न दें। इस स्थिति को लेकर नगर निगम क्षेत्र की जनता सवाल उठा रही है कि जो पूर्व प्रत्याशी आज कंबल वितरण में आगे नजर आ रहे हैं, वे कोरोना काल से लेकर अब तक कहां थे और चुनाव नजदीक आते ही उनकी तत्परता अचानक क्यों बढ़ गई।

    इतना ही नहीं, आरोप है कि पूर्व एवं भावी प्रत्याशी वन भोज और लिट्टी पार्टी जैसे आयोजनों के जरिए सीमित लोगों को एकत्र कर खुद फूलों का माला पहन नगर निकाय चुनाव में जीत का दावा कर रहे हैं और आम जनता को मनगढ़ंत बातों में उलझाकर गुमराह किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, कई जगहों पर वर्तमान पार्षदों को कंबल वितरण के दौरान फोटो खिंचवाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आदित्यपुर नगर निगम की स्थिति बेहद बेबस और लाचार नजर आ रही है और प्रत्येक वार्ड में पार्षद अपने स्तर से ही आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने को मजबूर हैं।

     

    सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि वर्तमान समय में जनता को किसी भी तरह की परेशानी हो या किसी कार्य की आवश्यकता पड़े, तो वे आखिर किसके पास जाएं। यहां तक कि SIR ट्रेनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी पार्षदों को आमंत्रित नहीं किया गया और केवल राजनीतिक दलों के नेताओं को बुलाकर औपचारिकता निभा दी गई। जब कंबल आयुक्त या अपर आयुक्त के नाम से आवंटित होते हैं, तो फिर पार्षद कोटे से कंबलों की कटौती क्यों की जा रही है, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है।

    सूत्रों के अनुसार, ठंड के नाम पर वितरित किए जा रहे कई कंबल नशेड़ियों द्वारा बेच दिए जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ सरकारी सुविधाओं का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि जरूरतमंदों के हक पर भी डाका डाला जा रहा है। यह भी आरोप है कि ठंड समाप्त होने के बाद बचे हुए कंबलों को नगर निगम द्वारा कचरे में फेंक दिया जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इस पूरे मामले की जवाबदेही कौन लेगा और गरीबों के हक के साथ हो रहे इस खेल का जवाब कौन देगा।

    आदित्यपुर नगर निगम में गरीबों के हक पर सियासी खेल नगर निकाय चुनावी सरगर्मी में कंबलों की राजनीति
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