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    प्रशांत किशोर- अशोक चौधरी एक दूसरे को जो कहना है कहें, लेकिन आचार्य कुणाल किशोर का नाम अपनी गंदी राजनीति में न घसीटे

    News DeskBy News DeskSeptember 24, 2025No Comments3 Mins Read
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    प्रशांत किशोर- अशोक चौधरी एक दूसरे को जो कहना है कहें, लेकिन आचार्य कुणाल किशोर का नाम अपनी गंदी राजनीति में न घसीटे

    किशोर कुणाल आज इस दुनिया में नहीं हैं, वे अपने पक्ष में सफाई नहीं दे सकते। उनकी मौत के बाद गंदे आरोप लगाकर अट्टहास करना पाप है, पाशविकता है।

    बिहार में कोई यह जानता हो या नहीं कि वो एक IPS ऑफिसर भी थे, लेकिन ये पूरा बिहार जानता है कि किशोर कुणाल ने पटना जंक्शन पर बने हनुमान मंदिर में अपना आजीवन सेवाएं दी।

    पटना स्टेशन पर बने महावीर मंदिर के लिए उन्होंने बड़े-बड़े राजनीतिक द्वंद्व लिया। हनुमान मंदिर बनाने के लिए तत्कालीन सरकार से लड़ें।

    उस दौर में जब अमीर-गरीब सब अपने सुविधानुसार बिहार छोड़कर जा रहे थे, तो उस समय किशोर कुणाल अपने परिवार को बिहार में ही रखा और रिटायरमेंट के बाद खुद किशोर कुणाल बिहार में ही रहे और अपना समाजसेवा का कार्य जारी रखा।

    किशोर कुणाल बिहार कैडर के नहीं गुजरात कैडर के ऑफिसर थे। गुजरात में भी रह सकते थें लेकिन नहीं, वे अपने घर लौटे और सरकारी सेवाएँ भी दी और फिर बाद में समाज सेवा में भी लगे रहें।

    आज जब देश भर में NGO बनाकर समाजसेवा का चलन बढ़ रहा है, वहीं किशोर कुणाल 25-30 साल पहले ये समाजसेवा का काम शुरू कर दिये थे । जब बिहार में सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टर्स सेवा नहीं देना नहीं चाहते थें उस वक्त किशोर कुणाल अपने NGO (महावीर ट्रस्ट) के द्वारा संचालित अस्पताल में दिल्ली और मुंबई से डॉक्टर्स बुलाए थें। बिहार में जब सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज न के बराबर होता था उस समय किशोर कुणाल ने पटना में महावीर कैंसर अस्पताल स्थापित किया था। अपने NGO के तहत बिहार में कई अस्पतालों का निर्माण करवाया था,और निर्माण के साथ-साथ वहां इलाज भी शुरू करवाया था।

    दान के रूप में मंदिर को मिले पैसों से अस्पताल चलाने का विचार 30 साल पहले किशोर कुणाल को आया था। आज भी महावीर ट्रस्ट के तहत आठ अस्पताल संचालित हो रहें हैं और वहां पर निशुल्क सेवाएं दी जा रही है।

    आचार्य कुणाल किशोर की अपनी एक अलग पहचान थी, इसके बावजूद वो राजनीति से दूर रहे, पार्टी-पॉलिटिक्स से कोसो दूर। हां, उन्होंने अपने बेटे सायन कुणाल को शादी की इजाज़त राजनीतिक परिवार में जरूर दिया।

    आज अशोक चौधरी को गाली देते-देते कुछ लोग किशोर कुणाल को भी गाली दे रहें हैं। किशोर कुणाल के व्यक्तित्व की तुलना अशोक चौधरी से हरगिज नहीं की जा सकती।

    अशोक चौधरी क्या हैं…नहीं हैं…वो समझें लेकिन किशोर कुणाल महान थे ।

    साभार: सौरव राज और पत्रकार पंकज प्रसून के फेसबुक वाल से

    प्रशांत किशोर- अशोक चौधरी एक दूसरे को जो कहना है कहें लेकिन आचार्य कुणाल किशोर का नाम अपनी गंदी राजनीति में न घसीटे
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