जब तक स्थिति सामान्य न हो, स्कूलों को बंद रखा जाना चाहिए
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
बीते लगभग एक महीने से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कों पर जलभराव, कीचड़ और फिसलन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हालात और भी गंभीर हैं, जहाँ सड़कों की स्थिति खराब हो गयी है। इन विपरीत परिस्थितियों का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। रोज़ाना स्कूल आना-जाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण और कभी-कभी जोखिमपूर्ण हो गया है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि शिक्षा विभाग स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल स्कूलों को बंद रखने का निर्णय ले — जब तक मौसम सामान्य न हो जाए।
स्कूल जाने वाले बच्चे अक्सर साइकिल, ऑटो, रिक्शा या बसों पर निर्भर होते हैं। बारिश के कारण रास्तों में जलजमाव और कीचड़ होने से फिसलने की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई जगह तो सड़क पर कीचड़,फिसलने की समस्याएं, सड़कें बह गई हैं। ऐसे हालात में बच्चों को रोजाना स्कूल भेजना एक जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से नुकसानदायक है।
लगातार हो रही बारिश में बच्चों और शिक्षकों के स्वास्थ्य पर भी खतरा उत्पन्न होता है। सर्दी, खांसी, बुखार जैसी बीमारियाँ इन परिस्थितियों में तेजी से फैलती रहती हैं। यदि समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई, तो यह स्थिति एक स्वास्थ्य संकट का रूप भी ले सकती है।
यह तर्क देना कि पढ़ाई रुक जाएगी, पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। आधुनिक तकनीक के युग में शिक्षा के वैकल्पिक माध्यम मौजूद हैं। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन क्लासेस, व्हाट्सएप ग्रुप्स और टेलीफोनिक मार्गदर्शन जैसे साधनों का सहारा लिया जा सकता है।
स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए। कोई भी शिक्षा तब तक प्रभावी नहीं हो सकती, जब तक विद्यार्थी मानसिक और शारीरिक रूप से सुरक्षित महसूस न करें। विभाग को चाहिए कि मौसम पर सतत निगरानी रखते हुए अगला निर्णय ले, और जब तक स्थिति सामान्य न हो, स्कूलों को बंद रखा जाए।
समाज की सबसे बड़ी पूंजी हमारे बच्चे हैं। उनकी सुरक्षा और भलाई के लिए लिया गया हर निर्णय दूरगामी सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। इसलिए समय की मांग है कि सरकार और शिक्षा विभाग तत्काल प्रभाव से स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश जारी करें। यह कदम केवल संवेदनशीलता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक सोच का भी प्रतीक होगा।

