Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » हाँ मैं पागल हो गया पापा
    Breaking News Headlines मेहमान का पन्ना

    हाँ मैं पागल हो गया पापा

    News DeskBy News DeskMay 21, 2025No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    हाँ, मैं पागल हो गया पापा

    – पागल हो गए हो क्या?
    – जी पापा, यूं ही समझ लीजिए। अंजलि से शादी करके ही शायद चैन की नींद सो पाऊंगा मैं। आपने तो मुझे हॉस्टल भेज कर सोचा कि मैं वह घटना भुला दूंगा मगर एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ कि मुझे चैन से नींद आई हो। खेल-खेल में ही भले मैंने अंजलि को धक्का दिया था, लेकिन उसके दिमाग पर लगी चोट ने उसे मानसिक रूप से कमजोर बना दिया और आजीवन वह बच्ची ही बन कर रह गई।
    पापा जी, अब मैं इस लायक हो गया हूं कि उसका इलाज कराने उसे विदेश ले जाऊं।
    – बेटा, उसका इलाज कराओ। मैं कहां मना कर रहा हूं उसका इलाज करने के लिए लेकिन उसके साथ शादी करने की क्या जरूरत है?
    यह तुम्हारा जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला है।
    – आप ठीक कह रहे हैं, पापा। शायद यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला हो मगर शादी के बिना उसे साथ लेकर कैसे विदेश जाऊंगा?
    – मगर बेटा, उसकी हरकतों को देखते हो? उसके मां-बाप कितने परेशान हो जाते हैं तो तुम कैसे मैनेज करोगे?
    – मैं कर लूंगा पापा। आपको याद है, अंजलि तो मेरे से भी बहुत होशियार थी। अंकल उसे आईएएस बनाना चाहते थे मगर मेरी गलती के कारण वह ऐसी बन कर रह गई। अंजलि ठीक नहीं हुई ना तो उसके पापा- मम्मी की जिम्मेदारी भी मैं लेने के लिए तैयार हूं।
    पापा जी, आज मैं जो कुछ भी हूं उसके पीछे भी अंजलि का ही हाथ है ।
    – वह कैसे बेटा?
    – उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए ही मैंने इतनी पढ़ाई की है और सारा समय मैं पढ़ता था क्योंकि मैं जानता था उसके इलाज के लिए बहुत पैसे कमाने होंगे।
    – चलो ठीक है बेटा, जिसमें तुम्हारी खुशी मेरी भी। आज तक अंजलि और उसके परिवार का दोषी अपने आप को ही माना है और जहां तक हो सके उसकी हर तरह से मदद करने की कोशिश की है। तुम्हारा यह फैसला शायद मुझे आज उनके सामने गर्व से खड़ा कर सके।
    – –
    डॉक्टर ऋचा यादव
    बिलासपुर छग

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleमेरा भारत महान?
    Next Article राष्ट्र संवाद हेडलाइंस

    Related Posts

    जमशेदपुर: हिमांशु हत्याकांड में बड़ी सफलता, भाजपा नेता व डीडी बार मालिक गिरफ्तार

    July 5, 2026

    यूसील में गहराया तनाव: डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली पर राष्ट्रीय स्तर तक सवाल

    July 5, 2026

    समाज में क्यों महत्वपूर्ण है संस्कार का मूल्य? जब एक बेटी ने अतिथि में देखा पिता का स्वरूप

    July 5, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    जमशेदपुर: हिमांशु हत्याकांड में बड़ी सफलता, भाजपा नेता व डीडी बार मालिक गिरफ्तार

    लोककला की अमर ज्योति: पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि

    यूसील में गहराया तनाव: डीजीएम पर्सनल राकेश कुमार की कार्यशैली पर राष्ट्रीय स्तर तक सवाल

    समाज में क्यों महत्वपूर्ण है संस्कार का मूल्य? जब एक बेटी ने अतिथि में देखा पिता का स्वरूप

    इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर बहस तेज़: अफवाहों और तथ्यों की पड़ताल

    सरायकेला: अवैध बालू उत्खनन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो ट्रैक्टर जब्त

    नारायण प्राइवेट आईटीआई का भव्य दीक्षांत समारोह संपन्न

    20.51 लाख की तीन योजनाओं का शिलान्यास, पेयजल व स्वच्छता सुविधा होगी मजबूत

    जोड़ा का केंद्रीय अस्पताल अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है, सरकार बदल गई, परंतु बदहाल अस्पताल जसकी तस रह गई

    पोटका में सरकारी जमीन पर भू-माफिया का फिर कब्जा: अंचल कर्मियों की मिलीभगत उजागर, CO की चुप्पी से बढ़े सवाल

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.