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    Home » तीन दिवसीय झारखंड बटरफ्लाई फेस्टिवल 2025 का समापन: तितलियों, पक्षियों और जंगल पारिस्थितिकी पर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारियाँ
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    तीन दिवसीय झारखंड बटरफ्लाई फेस्टिवल 2025 का समापन: तितलियों, पक्षियों और जंगल पारिस्थितिकी पर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

    Aman KumarBy Aman KumarApril 28, 2025No Comments3 Mins Read
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    तीन दिवसीय झारखंड बटरफ्लाई फेस्टिवल 2025 का समापन: तितलियों, पक्षियों और जंगल पारिस्थितिकी पर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारियाँ
    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर तीन दिवसीय झारखंड बटरफ्लाई फेस्टिवल 2025 का अंतिम दिन यानी समापन दिन सबसे पहले सबेरे-सबेरे जंगल ट्रेल पर प्रतिभागियों को डॉ. वी. पी. उनियाल, पूर्व वैज्ञानिक भारतीय वन्य जीव संस्थान , देहरादून एवं डॉ गोपाल शर्मा, डायरेक्टर राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केंद्र, पटना के साथ साथ डॉ. वंदना मेहरवाल के नेतृत्व में जंगल का भ्रमण कराया गया. जिसमें लगभग 1 किलोमीटर की दुरी में जंगल में पाए जाने वाले पक्षियों एवं तितलियों तथा अन्य कीड़े-मकोड़ों एवं वनस्पतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी .
    तितली विशेषग्य डॉ. वी. पी. उनियाल ने बहुत ही वारिकी से उनके अधिवास एवं उनके होस्ट प्लांट के बारे में विस्तृत जानकारी दी साथ ही साथ तितलियों के विभिन्न प्रजातियों के बारे में एवं उनके पहचान के तरीकों के बारे में भी बताया . डॉ उनियाल ने बतया कि तितलियाँ जलवायु परिवर्तन की सूचक हैं. हमारे वातावरण में होने वाले परिवर्तन का प्रभाव तितलियों के आवास एवं जीवन चक्र पर क्या क्या प्रभाव पड़ रहा है इसके वारे में भी जानकारी दी .
    डॉ.गोपाल शर्मा ने प्रतिभागियों को पक्षियों की पहचान के तरीके उनके आवास एवं उनके उपयोगिता के वारे में विस्तृत जानकारी दी. साथ ही साथ उन्होंने ने चिड़ियों की फोटोग्राफी के माध्यम से बच्चों को चिड़ियों की पहचान एवं दलमा क्षेत्र में पाये जाने वाली मुख्य पक्षियों के वारे में बच्चों का ध्यान केन्द्रित किया.
    उन्होंने यह भी बताया कि कुछ पल्शियाँ पक्षियाँ हमारे पर्यावरण से कम होती जा रही हैं, जिनमें गौरैया गिद्ध तथा कुछ जलीय पक्षी की प्रजातियाँ कम हो रही हैं जिनका मुख्य कारण पर्यावरण में किये जा रहे कीट नाशकों के का अंधाधुंध प्रयोग है . कृषि एवं वागवानी में होने बाले कीटनाशकों के वारे में भी बताया. गौरैया के बचाव के लिए अपने द्वारा किये गए प्रयासों जैसे गौरैया के लिए छोटे छोटे लकड़ी के घोंसले बनाकर उनको बांटने का काम किया जिसमें गौरैया अपना घोषला बना कर उसमें अंडे देना शुरू किया है .
    डॉ. वन्दना मेहरवाल ने जंगल पारिस्थितिकी के बारे में यह जानकारी दी कि जंगल में उगने वाली हरेक वनस्पति का हमारे जीवन एवं जीव जंतुओं के जीवन चक्र पर गहरा प्रभाव रहता है . साथ ही साथ उन्होंने उन पौधों के वारे में भी जानकारी दी जो कि बाहरी क्षेत्र से आकर हामरी पारिस्थिकी तन्त्र को प्रभावित करती हैं जिससे जंगल पारिस्थितकी के ऊपर विपरीत प्रभाव पड़ता है .डॉ. वी पी उनियाल ने अपने लेक्चर में विषय बायोइंडिकेटर इम्सेक्ट के वारे में विस्तृत जानकारी दी कि ये हमारे पर्यावरण के सूचक के रूप में काम करते हैं जिससे हमे वातावरण में एवं पर्यावरण के स्वश्टी के वारे में जानकारी प्राप्त होती है.डॉ धारा ठक्कर मुंबई ने तितलियों को अपने घरों में कैसे रिअरिंग करते हैं अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रशासनिक पत्र देकर सम्मानित किया गया

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