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    Home » धनशोधन मामले में हेमंत सोरेन को मिली जमानत, जेल से रिहा
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    धनशोधन मामले में हेमंत सोरेन को मिली जमानत, जेल से रिहा

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 28, 2024No Comments4 Mins Read
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    धनशोधन मामले में हेमंत सोरेन को मिली जमानत, जेल से रिहा

    रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को शुक्रवार को जमानत दे दी जिसके बाद सोरेन को जेल से रिहा कर दिया गया।

    अदालत ने सोरेन की जमानत याचिका पर अपना फैसला 13 जून को सुरक्षित रख लिया था।

    न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की एकल पीठ द्वारा पारित आदेश में कहा गया, ‘‘…याचिकाकर्ता को 50,000 रुपये के जमानत मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।’’

     

     

     

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन के मामले में 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। सोरेन (48) बिरसा मुंडा जेल में कैद थे।

    सोरेन के वरिष्ठ वकील अरुणाभ चौधरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सोरेन को जमानत दे दी गई है। अदालत ने कहा है कि प्रथम दृष्टया, वह दोषी नहीं हैं और जमानत पर रिहाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा कोई अपराध किए जाने की कोई आशंका नहीं है।’’

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमानत मिलने पर खुशी जताई।

    उच्च न्यायालय से सोरेन को जमानत देने का आदेश आने के बाद झामुमो और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में मिठाई बांटते देखा गया।

    सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के वकील एस वी राजू ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) पुलिस थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों का जिक्र करते हुए दलील दी कि अगर सोरेन को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह इसी तरह का अपराध फिर करेंगे।

     

     

     

    अदालत ने कहा, ‘‘यद्यपि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा याचिकाकर्ता के आचरण को एजेंसी के अधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उजागर किया गया है लेकिन मामले के समग्र परिप्रेक्ष्य में, याचिकाकर्ता द्वारा समान प्रकृति का अपराध करने की कोई संभावना नहीं है।’’

    एकल पीठ के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि अदालत का निष्कर्ष है कि ‘‘पीएमएलए, 2002 की धारा 45 की शर्त के तहत यह मानने का कारण है कि याचिकाकर्ता आरोपित अपराध का दोषी नहीं है’’।

    बचाव पक्ष और ईडी की ओर से दलीले पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित कर लिया था।

    वकील ने बताया कि ईडी का पक्ष रख रहे अधिवक्ता जोहैब हुसैन ने एकल पीठ के आदेश के अमल पर 48 घंटे तक रोक लगाने का अनुरोध किया ताकि फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जा सके लेकिन उच्च न्यायालय ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया।

    सोरेन ने उच्च न्यायालय से मामले की तेजी से सुनवाई करने का अनुरोध किया था।

    इस बीच, राज्य की झामुमो नीत सरकार में मंत्री और सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन पार्टी के केंद्रीय महासचिव बिनोद पांडेय के साथ जमानत मुचलका भरने की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दीवानी अदालत पहुंचे।

    जमानत मुचलके विशेष पीएमएलए न्यायाधीश राजीव रंजन की अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे।

    सोरेन की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने इससे पहले दलील दी थी कि झामुमो नेता को अनुचित तरीके से निशाना बनाया गया है। उन्होंने इसे ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ और ‘‘मनगढ़ंत’’ मामला करार दिया था।

     

     

     

     

    वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी सोरेन का अदालत में पक्ष रखा और पूर्व मुख्यमंत्री की जमानत के लिए दलील पेश करते हुए कहा था कि केंद्रीय एजेंसी ने उन्हें एक आपराधिक मामले में झूठा फंसाया है।

    सोरेन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य की राजधानी में बड़गाम अंचल में 8.86 एकड़ जमीन ‘‘अवैध रूप से’’ हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री के अपने पद का दुरुपयोग किया था।

    ईडी ने दावा किया कि जांच के दौरान सोरेन के मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने स्वीकार किया था कि पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें उक्त भूखंड के स्वामित्व में बदलाव करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों से छेड़छाड़ करने का निर्देश दिया था।

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