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    Home » भारत की तुलना चीन से करने का कोई मतलब नहीं, करनी ही है तो लोकतंत्र से करें : पीएम मोदी
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    भारत की तुलना चीन से करने का कोई मतलब नहीं, करनी ही है तो लोकतंत्र से करें : पीएम मोदी

    Devanand SinghBy Devanand SinghDecember 22, 2023No Comments3 Mins Read
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    भारत की तुलना चीन से करने का कोई मतलब नहीं, करनी ही है तो लोकतंत्र से करें : पीएम मोदी

    नई दिल्ली: चीन के साथ बार-बार तुलना के बीच, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक बाधाओं और कौशल अंतर पर चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि भारत की तुलना अन्य लोकतंत्रों के साथ की जानी चाहिए, न कि अपने पड़ोसी देशों के साथ। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, “यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि आपने जिन मुद्दों पर प्रकाश डाला है, वे सुझाव के अनुसार व्यापक होते तो आज भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल नहीं कर पाता।” उन्होंने आगे कहा, “अक्सर, ये चिंताएं धारणाओं से उत्पन्न होती हैं और धारणाओं को बदलने में कभी-कभी समय लगता है।”

     

    भारत में रोजगारों में तेजी बढ़ी है
    CMIE डेटा के आधार पर अर्थव्यवस्था में रोजगार की गंभीर स्थिति के दावों के बीच, मोदी ने अनुमान का खंडन करते हुए कहा की Periodic Labour Force Survey  के मुताबिक भारत में नए तरह के रोजगारों में “वास्तव में तेजी” आई है। इसी तरह, उन्होंने वैश्विक कंपनियों में भारतीय मूल के सीईओ की उपस्थिति की ओर इशारा करते हुए सुझाव दिया कि देश में कौशल की कोई कमी नहीं है। सत्या नडेला, सुंदर पिचाई और अरविंद कृष्णा जैसे कई भारतीय मूल के अधिकारी इंद्रा नूई और अजय बंगा के नक्शेकदम पर चलते हुए माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और आईबीएम जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का नेतृत्व करने के लिए आगे बढ़े हैं, जो पेप्सी और मास्टरकार्ड के प्रमुख थे।

     

    ग्लोबल स्टैंडर्ड को मेंटेन करना है
    मोदी ने कहा कि सरकार “ऐसी स्थितियाँ बनाना चाहती है जहाँ हर कोई भारत में निवेश करना और अपने परिचालन का विस्तार करना उचित समझे”, हालांकि, यह टिप्पणी ऐसे समय में आ रही है जब भारत निवेश की तलाश कर रहा है, उत्पादन जैसी योजनाओं के माध्यम से simplified नियमों और प्रोत्साहनों का वादा कर रहा है। पीएम ने कहा,’ हम एक ऐसी प्रणाली की कल्पना करते हैं जहां दुनिया भर में हर कोई भारत में अपने घर जैसा महसूस करे, जहां हर process और living standard परिचित और स्वागत योग्य हैं। यह वो ग्लोबल स्टैंडर्ड जिससे हम बनाने की इच्छा करते हैं।

    सब को अपनी बात रखने का हक है
    देश में लोकतंत्र खतरे में होने के विपक्ष के आरोपों पर पीएम ने कहा, ”हमारे आलोचक अपनी राय रखने के हकदार हैं और उन्हें व्यक्त करने की आजादी है। हालांकि, ऐसे आरोपों के साथ एक बुनियादी मुद्दा है, जो अक्सर आलोचना के रूप में सामने आते हैं।’ उन्होंने कहा, ”ये दावे न केवल भारतीय लोगों की बुद्धिमत्ता का अपमान करते हैं बल्कि विविधता और लोकतंत्र जैसे मूल्यों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को भी कम आंकते हैं।’

     

     

    जब पीएम से पूछा गया कि भारत में मुस्लिम माइनॉरिटी का क्या भविष्य है, तो मोदी ने भारत के पारसियों की आर्थिक सफलता का हवाला दिया, जिन्हें उन्होंने “भारत में रहने वाले धार्मिक micro-minority ” के रूप में वर्णित किया। मोदी ने एक जवाब में कहा, “दुनिया में कहीं भी उत्पीड़न का सामना करने के बावजूद, उन्हें भारत में एक सुरक्षित आश्रय मिल गया है, वे खुशी से और समृद्ध होकर रह रहे हैं।” उन्होंने देश के लगभग 200 मिलियन मुसलमानों का कोई सीधा संदर्भ नहीं दिया। उन्होंने कहा, ”इससे पता चलता है कि भारतीय समाज में किसी भी धार्मिक अल्पसंख्यक के प्रति भेदभाव की कोई भावना नहीं है।”

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