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    Home » हुल क्रांति दिवस एक उलगुलान दिवस के रूप में हमेशा जाना जाएगा
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    हुल क्रांति दिवस एक उलगुलान दिवस के रूप में हमेशा जाना जाएगा

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 30, 2019No Comments3 Mins Read
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    झारखंड विकास मोर्चा के तत्वाधान में आज आदम कद प्रतिमा सिदो कान्हू के प्रतिमा पर आज झारखंड विकास मोर्चा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के द्वारा हूल दिवस के अवसर पर शहीद सिदो कानू के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
    वही माल्यार्पण के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए अभय सिंह ने कहा कि आज 30 जून शहीद सिदो कानू चांद, भैरव को याद करते हुए संपूर्ण झारखंड हूल दिवस मना रहा है ।
    क्योंकि आज के ही दिन 30 जून 1955 को संथाल परगना के भोग नाडीह, गांव में अंग्रेजों ने दोनों भाइयों को शहीद कर दिया था ।जिसके फलस्वरूप प्रत्येक वर्ष उनकी याद में संपूर्ण झारखंड के लोग हूल दिवस मना रहे हैं आज हूल दिवस की महत्ता इस बात को प्रमाणित होती है कि जब अंग्रेजो के खिलाफ कोई व्यक्ति बोलने वाला नहीं होता था वैसी परिस्थिति में झारखंड के सुदूर गांव में सिदो ,कानू के द्वारा उलगुलान किया गया । हूल विद्रोह किया गया और सैकड़ों आदिवासी भाइयों को अंग्रेजो के खिलाफ हथियार उठाने के लिए मजबूर किया गया और उसके बाद एक जन क्रांति लोगों को देखने को मिला । अंग्रेजों के दांत खट्टे हो गए ।
    अंग्रेजों को लगा जिस देश का आदिवासी अगर विद्रोह कर देता है तब ऐसी स्थिति में आने वाला समय बिल्कुल भयावह होगा और उस समय लॉर्ड ने कहा कि अब अंग्रेजों के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है ।हमें रहने की आवश्यकता है ।
    ज्ञातव्य हो 18 55 के उलगुलान के बाद ही 18 सो 57का महा स्वतंत्र संग्राम का आंदोलन प्रारंभ जो गया था।
    पूरे हिंदुस्तान के अंदर अट्ठारह सौ पचपन का हूल दिवस आंदोलन पूरे रग रग हर गांव हर कस्बे हर शहर में या फैल गया जिसका नतीजा निकला कि अंग्रेजो के खिलाफ समूचा हिंदुस्तान धीरे-धीरे उठ खड़ा हुआ ।इसलिए हमारे लिए हुल क्रांति दिवस एक उलगुलान दिवस के रूप में हमेशा जाना जाएगा ।अगर आज देश के आजादी 15 अगस्त 1947 को हमने प्राप्त की तो उसका देती जा है अगर सिद्धू कानू चांद भैरव बिरसा मुंडा तिलकामांझी जैसे महान पुरुषों के द्वारा अगर अंग्रेजो के खिलाफ सामंतवादी प्रथा के खिलाफ अगर गुलाम नहीं होता आज हमारा देश आजाद नहीं होता ।
    मंच का संचालन करते हुये जिलाध्यक्ष बबुआ सिंह ने कहा कि अब झारखंड में एक नए उलगुलान की जरूरत है। समूचे झारखंड को लूटा जा रहा है। आज रक्षक ही भक्षक हो गए है । अब हमें नई क्रांति का जन्म करना होगा ।
    कार्यक्रम में मुख्य रूप से जटा शंकर पांडेय , ताराचंद कालिंदी, पप्पू सिंह सूर्य कांत झा उषा जी रघुनंदन जी लल्लन चौहान कन्हैया पुष्टि नरेश अग्रवाल अनिल शर्मा राहुल कुमार पप्पू सिंह राजेश मुखी चेतन मुखी परशुराम मुखी विजय गुप्ता सरदार विक्की सिंह रंजन कुमार सुमित श्रीवास्तव अमित सिंह दीपक महानंद निवारण विशाल लव सिंह सरदार रतन सिंह संतोष तिवारी संगीता शर्मा बच्चे लाल भगत जीवनलाल राजेंद्र शर्मा अमित तिवारी निर्भय सिंह सुमित श्रीवास्तव रविंद्र ठाकुर अजय कुमार अनिरुद्ध पांडे लोकनाथ त्रिपाठी आरडी बर्मन सुमित लाल बिस्वजीत घोष सहित सैकड़ों कार्यकर्ता जय हिंद वंदे मातरम भारत माता की जय शहीद सिद्धू कानू अमर रहे भगवान बिरसा मुंडा अमर रहे का शंखनाद कर माल्यार्पण किए ।

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