Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » हिंदी की लंबी कविताएं आजादी पूर्व और बाद के भारत का दहकता हुआ इतिहास हैं: अरुणाभ सौरभ
    Uncategorized

    हिंदी की लंबी कविताएं आजादी पूर्व और बाद के भारत का दहकता हुआ इतिहास हैं: अरुणाभ सौरभ

    Begusarai SamvadBy Begusarai SamvadJuly 4, 2022No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    बेगूसराय : सोमवार को हिंदी विभाग गणेश दत्त महाविद्यालय के तत्वावधान में हिंदी की लंबी कविता और आद्य नायिका विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप इन हिंदी एवं मैथिली के ख्यातिलब्ध युवा कवि एवं आलोचक डॉ अरुणाभ सौरभ ने हिंदी की लंबी कविताओं के इतिहास पर बात रखते हुए कहा कि भारत की विभिन्न भाषाओं और खास कर हिंदी में लंबी कविताओं की मजबूत और पुरानी परंपरा रही है। निराला से सरोज स्मृति और राम की शक्ति पूजा से लेकर राजकमल चौधरी मुक्ति प्रसंग , मुक्ति बोध की अंधेरे में ब्रह्म राक्षस से लेकर आद्य नायिका तक भारत के सांस्कृतिक इतिहास को समेटा गया है। हिंदी की लंबी कविताएं आजादी पूर्व और आजादी बाद के भारत का दहकता हुआ इतिहास हैं।
    कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो कमलेश कुमार ने कहा कवि के रूप में डॉ अरुणाभ ने जन सरोकार के लक्ष्यों को पूरा करने का काम किया है। इन्होंने आद्य नायिका के बहाने इतिहास में कदम रख कर वर्तमान को आंदोलित करने का काम किया है। वहीं डॉ अरमान आनंद ने संचालन करते हुए कहा कि आद्यनायिका एक विशुद्ध सामाजिक-राजनैतिक सरोकारों से जुडी हुई कविता है।
    वहीं डॉ अभिषेक कुंदन ने कहा कि हिंदी साहित्य में कवियों की भावनाओं एवं विचारों को आधार एवं विस्तार लंबी कविताओं ने ही प्रदान किया है। हिंदी साहित्य में लंबी कविताओं का अपना एक विशेष महत्व रहा है जिसमें निराला और मुक्तिबोध जैसे कवियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
    कार्यक्रम के अध्यक्षीय वक्तव्य में महाविद्यालय पर प्रधानाध्यापक प्रो राम अवधेश कुमार ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम से महाविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण का विकास होता है। इस प्रकार के कार्यक्रम होते रहने चाहिए। अंत मे धन्यवाद ज्ञापन करते हुए हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो बिपिन कुमार चौधरी ने हिंदी की लंबी कविताओं को महाकाव्य और खण्ड काव्य का आधुनिक रूप बताया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वक्ता अरुणाभ सौरभ और कवयित्री रूपम झा ने हिंदी एवं मैथिली कविताओं का पाठ किया।कार्यक्रम में भौतिक विभाग के अध्यक्ष प्रो नौशाद आलम, मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो अनिल कुमार, अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर जिकरुल्ला खान संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एस के पांडेय, हिंदी विभाग की प्रो श्रवसुमि कुमारी, प्रो अंजू कुमारी उर्दू विभाग के प्रोफेसर अब्दुल्ला, एवं महाविद्यालय के छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleसंजात पुस्तकालय पर नवनिर्वाचित विधान पार्षद का किया अभिनंदन
    Next Article 9 जुलाई को स्थापना दिवस पर कई कार्यकक्रम का आयोजन करेगी एबीवीपी : कन्हैया

    Related Posts

    कोलडीहा में भीषण सड़क हादसा: तेज रफ्तार ट्रक ने बोरवेल वाहन को मारी टक्कर, तीन मजदूर गंभीर

    July 25, 2026

    सासाराम में भीषण सड़क हादसा: टूरिस्ट बस और तेल टैंकर की टक्कर, 23 यात्री घायल

    July 25, 2026

    पी. पद्मा राव बनीं ‘स्ट्रांग वुमन ऑफ झारखंड’, नेशनल पावरलिफ्टिंग के लिए चयनित

    July 21, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    सोना देवी यूनिवर्सिटी एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड 2026 में 112 शिक्षाविद सम्मानित, छह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

    जमशेदपुर में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की राष्ट्रीय बैठक, मंटू अग्रवाल बने जिला अध्यक्ष

    बागबेड़ा प्राथमिक विद्यालय के जर्जर कमरों की मरम्मत की मांग, प्रमुख को सौंपा ज्ञापन

    मानगो में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर मेयर का फोकस, एक माह में खुलेंगे तीन नए अर्बन हेल्थ सेंटर

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का विजय जुलूस, छात्रों के संघर्ष की जीत बताया

    तुलसी भवन की विषय संप्रेषण प्रतियोगिता में डी.बी.एम.एस. कदमा की तन्वीशा नंदन प्रथम

    नीट विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: मोदी सरकार के दबाव में झुकने का सिलसिला

    नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और मोदी सरकार के पीछे हटने के प्रमुख मामले

    प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया: धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार

    प्रह्लाद जोशी बने शिक्षा मंत्री, धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिला अतिरिक्त प्रभार

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.