वक़्फ़ संशोधन बिल भारतीय संविधान पर कुठाराघात – अलीमुद्दीन अंसारी
राष्ट्र संवाद संवाददाता/जामताड़ा
झारखंड तहरीक उर्दू तंजीम के संयोजक सह समाजसेवी मो अलीमुद्दीन अंसारी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अपनी राय जाहिर करते हुए वक्फ संशोधन बिल को गलत ठहराया है उन्होंने कहा है कि वक्फ अधिनियम 1995 के विपरीत षड्यंत्र के तहत वक्फ संशोधन बिल पास कराकर एनडीए सरकार संविधान की धज्जियां उड़ा दिया है सभी सेकुलर पार्टिया, समाजवादी विचारधारा रखने वाले माननीय कम्युनल हो गए। मो अलीमुद्दीन ने कहा नया बिल संविधान के उल्लंघन हैं अनुच्छेद 14 के तहत समानता का अधिकार धर्म ,जाति, लिंग ,भेदभाव निषेध है।तर्कसंगत धार्मिक वर्गीकरण की अनुमति देती है। न्यायालय और शासन में समान भागीदारी की गारंटी देता है। अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार सभी व्यक्तियों को दिलाता है धार्मिक विश्वास रखना और इबादत करने की स्वतंत्रता ,राज्य धार्मिक गैर जरूरी प्रथाओं और सामाजिक सुधारो को सिर्फ नियंत्रित कर सकती है। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन की स्वतंत्रता धार्मिक संप्रदाय स्थापित और संचालित करने, संपत्ति अधिग्रहण, प्रबंधन ,धार्मिक मामलों का संचालन स्वतंत्र रूप से सभी नागरिक कर सकते हैं। अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा नागरिकों के किसी भी वर्ग को जो विशिष्ट भाषा , लिपि अथवा संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार है। धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों दोनों पर लागू होता है,सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करता है। मो अलीमुद्दीन ने कहा वक्फ बिल के अनुसार कमेटी में कई लोग होंगे जिसमें कुछ गैर मुस्लिम होंगे, सरकार के षड्यंत्र कारी इरादे को जाहिर करती है, मुसलमानो के मिल्कियत को हड़पने और अडानी अंबानी को वक्फ भूमि देने का षड्यंत्र है। मुसलमान सरकार की इस विभाजनकारी नीति का पुरजोर विरोध करती हैं संवैधानिक ढंग से विरोध प्रदर्शन करते हुए लागू नहीं होने देंगे, नहीं मानेंगे।