रतन कुमार की रिपोर्ट
खुटौना (मधुबनी)। प्रखंड में निर्धारित सरकारी समय सीमा 15 फरवरी से करीब एक सप्ताह पहले ही पैक्सों द्वारा किसानों से धान की खरीदारी बंद कर दिये जाने के कारण किसान परेशान हैं। किसान दो-तीन महीने पहले ही धान बेचने के लिए अपने कागजात ऑनलाइन कर चुके थे और अपनी बारी का इन्तजार कर रहे थे। लेकिन कैशक्रेडिट या सीसी के अभाव में कई पैक्सों ने इसके पहले ही धान खरीदना बंद कर दिया है। कई किसान सीसी आने की आशा में हजारों बोरे धान पैक्स परिसरों में रख चुके थे। लेकिन उन्हें अपना धान वापस ले जाने को कहा जा रहा है। चतुर्भुज पीपराही के पैक्स अध्यक्ष कुशेश्वर प्रसाद सिंह के अनुसार किसान पैक्स से अपना धान वापस ले जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं क्योंकि धान रखने के लिए उनके पास व्यवस्था नहीं है। कारमेघ उत्तरी पैक्स के अंतर्गत लौकहा के बृजनंदन प्रसाद गुप्ता तथा उनके दो भाई एक माह से पैक्स में धान बेचने की कोशिश में थे। लेकिन सीसी नहीं रहने के कारण वे लोग इन्तजारकररहे थे। अब खरीदारी ही बंद हो चुके हैअं। ऐसे में वे लोग और भी परेशान हैं। वे बताते हैं कि सरकार के रवैए से आक्रोशित किसान सड़क पर धान के बोरे रखकर सड़क जाम करने की बात सोच रहे हैं। धान की खरीदारी बंद कर दिये जाने के संबंध में बीसीओ हर्षवर्धन का कहना है कि जिले के लिए धान खरीद का निर्धारित लक्ष्य एक लाख पांच हजार एमटी था। इसे संशोधित कर 85 हजार एमटी कर दिया गया है। इसलिए प्रखंड ने भी पूर्व निर्धारित लक्ष्य साढ़े पांच हजार एमटी को संशोधित कर चार हजार एमटी कर दिया है और यह लक्ष्य पूरा भी हो चुका है। इसी वजह से पैक्सों द्वारा खरीदारी बंद कर दी गई है। इस संशोधन ने स्थिति ऐसी बना दी है कि किसान औने-पौने दाम में धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं। माकपा नेता उमेश घोष ने किसानों की परेशानी दूर करने के लिए प्रखंड के लिए धान खरीदारी का निर्धारित लक्ष्य और समय सीमा दोनों को बढ़ाने की मांग की है।