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    Home » चीन ने गलवान में घायल सैनिक को थमाई ओलंपिक मशाल, अमेरिका ने की निंदा
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    चीन ने गलवान में घायल सैनिक को थमाई ओलंपिक मशाल, अमेरिका ने की निंदा

    Bishan PapolaBy Bishan PapolaFebruary 3, 2022No Comments2 Mins Read
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    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के एक अखबार द्वारा गलवान घाटी में भारतीयों सैनिकों के साथ झड़प के दौरान 38 से अधिक चीनी सैनिकों के नदी में बहने की खबर के बाद इसी से संबंधित एक और खबर ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। दरअसल, चीन ने भारत के साथ गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प में जख्मी जवान को चीन की ओर से विंटर ओलंपिक मशाल थमाई गई। जिसकी दुनिया में काफी आलोचना हो रही है। अमेरिका ने भी इसकी कड़ी निंदा की है। चीनी सेना के रेजिमेंटल कमांडर को विंटर ओलंपिक की मशाल थमाई गई है। बता दें कि यह सैनिक जून, 2020 में लद्दाख के पास गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों से झड़प के दौरान जख्मी हुआ था। चीन ने इस घटना में अपने महज 4 से 5 सैनिकों के ही मारे जाने की बात काफी लंबे समय बाद स्वीकार की थी। लेकिन दूसरे देशों की न्यूज एजेंसी की ओर से 40 चीनी सैनिकों के मारे जाने के दावे किए जाते रहे हैं। की फाबाओ नाम के जिस सैनिक को चीन की ओर से मशाल थमाई गई है, उसके सिर में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के दौरान गंभीर चोटें आई थीं। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे, लेकिन चीन की ओर से लगातार अपने सैनिकों के मारे जाने की खबर छिपाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। अब एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार ने दावा किया है कि झड़प के दौरान कई चीनी सैनिक तेज धारा वाली गलवान नदी पार करते हुए अंधेरे में डूब गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने तथ्यों को प्रभावित करने के लिए गलवान में हुई दो अलग-अलग झड़पों के तथ्यों और तस्वीरों को आपस में जोड़ दिया। उधर, सैनिक को मशाल थमाई जाने के संबंध में अमेरिका ने इसे चीन का शर्मनाक कदम बताते हुए कहा है कि यह खेलों के राजनीतिकरण करने का प्रयास है। अमेरिका की विदेश मामलों की संसदीय समिति में शामिल सीनेटर ने कहा कि चीन का यह फैसला शर्मनाक है। सीनेटर जिम रिस्क ने ट्वीट किया कि यह शर्मनाक है कि बीजिंग ने ऐसे व्यक्ति हाथों में विंटर ओलंपिक की मशाल थमा दी, जो भारत पर किए गए सैन्य हमले में शामिल था। इसके अलावा वह शख्स सेना का भी हिस्सा है, जिसने उइगर मुस्लिमों का नरसंहार किया। अमेरिका की ओर से उइगरों की आजादी और भारत की संप्रभुता का समर्थन जारी रहेगा।’

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