Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » ओली के बिगड़े बोल, भारतीय क्षेत्रों को फिर अपना बताया, कहा- इन्‍हें वापस लेंगे
    Breaking News Headlines अन्तर्राष्ट्रीय

    ओली के बिगड़े बोल, भारतीय क्षेत्रों को फिर अपना बताया, कहा- इन्‍हें वापस लेंगे

    Devanand SinghBy Devanand SinghJanuary 11, 2021No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    काठमांडू. घरेलू सियासत में बुरी तरह फंसे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने देश के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए फिर भारत के क्षेत्रों को अपना बताया है. ओली ने कहा कि वह भारत से कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख क्षेत्र को वापस लेकर रहेंगे. उनका यह बयान इसलिए भी अहम है कि सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच विदेश मंत्री स्तर की बातचीत होने वाली है.

    चीन के चंगुल में फंसे नेपाली प्रधानमंत्री ने भारत को उकसाने की यह कोशिश नेशनल असेंबली में अपने संबोधन में की. ओली ने कहा कि सीमा विवाद पर बातचीत करने के लिए भारत जा रहे विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली के एजेंडे में इन तीनों क्षेत्रों को वापस लेना प्रमुख है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर ग्यावली विदेश मंत्री स्तर की छठवें नेपाल-भारत संयुक्त आयोग की बैठक में भाग लेने के लिए 14 जनवरी को भारत आ रहे हैं.

    सुगौली समझौते का दिया हवाला- ओली ने कहा कि सुगौली समझौते के मुताबिक कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख महाकाली नदी के पूरब में स्थित और नेपाल का हिस्सा हैं. हम भारत के साथ कूटनीतिक वार्ता करेंगे और हमारे विदेश मंत्री भी भारत जा रहे हैं. आज, हमें हमारी जमीन वापस लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद जब भारतीय सैन्य बलों ने इन क्षेत्रों में अपना ठिकाना बनाना शुरू किया था तो नेपाली शासकों ने इन क्षेत्रों को वापस लेने की कोशिश नहीं की.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous ArticleTMC सांसद कल्याण बनर्जी ने देवी सीता को लेकर कहीं अपमानजनक बातें, दर्ज हुई FIR
    Next Article MP में हैवानियत की हदें पार: सीधी में गैंगरेप करके प्राइवेट पार्ट में डाला सरिया

    Related Posts

    आदिवासी समाज: भारत की आत्मा एवं प्रकृति के संरक्षक – विश्व आदिवासी दिवस विशेष

    August 9, 2026

    रणनीतिक कूटनीति: अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों का आधिकारिक मानचित्रण और भारत-चीन संबंध

    August 9, 2026

    विश्व आदिवासी दिवस 2026: भारत की आत्मा और प्रकृति के संरक्षक हैं आदिवासी

    August 9, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    आदिवासी समाज: भारत की आत्मा एवं प्रकृति के संरक्षक – विश्व आदिवासी दिवस विशेष

    रणनीतिक कूटनीति: अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों का आधिकारिक मानचित्रण और भारत-चीन संबंध

    विश्व आदिवासी दिवस 2026: भारत की आत्मा और प्रकृति के संरक्षक हैं आदिवासी

    अरुणाचल प्रदेश: कार्टोग्राफिक कूटनीति और भारत-चीन संबंध में रणनीतिक पहल

    IIT दिल्ली दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का युवाओं को संदेश: भविष्य की कमान Gen Z के हाथों में

    विश्व आदिवासी दिवस 2026: भारत की आत्मा और प्रकृति के संरक्षक हैं आदिवासी

    IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में PM मोदी का युवाओं को संदेश

    अरुणाचल प्रदेश: कार्टोग्राफिक कूटनीति से चीन को स्पष्ट संदेश, 27 स्थानों का आधिकारिक मानचित्रण

    वाढवण बंदरगाह: 76,200 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट से बदलेगी भारत की समुद्री तस्वीर

    Film Expo India 2026: दिल्ली में सजेगा फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा मंच, विंदू दारा सिंह ने CM रेखा गुप्ता को दिया न्योता

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.