Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » कोरोनावायरस की वजह से सदियों पुरानी परंपरा टूटी, नहीं हो सका रथ का परिभ्रमण
    Breaking News झारखंड

    कोरोनावायरस की वजह से सदियों पुरानी परंपरा टूटी, नहीं हो सका रथ का परिभ्रमण

    Nizam KhanBy Nizam KhanJune 23, 2020No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    कुंडहित/जामताड़ा :     पहली बार भगवान जगन्नाथ अपने मासी बाड़ी नहीं जा सके। कोरोनावायरस की वजह से सदियों पुरानी यह परंपरा मंगलवार को टूट गई। मंगलवार को कुंडहित मुख्यालय के दोनों मंदिरों में भगवान जगन्नाथ की रथ तो सज धज कर तैयार हुई लेकिन रथ का परिभ्रमण नहीं कराया जा सका। प्रशासन द्वारा इसकी अनुमति नहीं दी गई। रथ परिभ्रमण नहीं होने के कारण पहली बार कुंडहित में रथयात्रा के दिन मेला नहीं लग पाया। उल्लेखनीय है कि रथयात्रा कुंडहित के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। रथ यात्रा के दिन विशेष गहमागहमी रहती है और काफी बड़ी तादाद में कुंडहित एवं आसपास के इलाके से लोग रथयात्रा का मेला देखने कुंडहित पहुंचते हैं। मेला नहीं लगने के कारण इस बार श्रद्धालुओं का आवागमन नगण्य नहीं रहा। मंदिर समिति से जुड़े लोगों ने भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलराम और सुभद्रा की पूजा अर्चना की। भक्तों की संख्या जरूर कम थी लेकिन पूजा को लेकर होने वाले जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं थी। गिने-चुने भक्तों ने पूरे जोशो खरोश के साथ पूजा अर्चना की प्रक्रिया पूरी की। कुंडहित का रथ मेला आसपास के क्षेत्र में खासा चर्चित रहा है लेकिन कोरोनावायरस की वजह से इस बार मेले का आयोजन नहीं किया जा सका। वही मुख्यालय में भी स्थानीय भक्तगण ही पूजा अर्चना की प्रक्रिया पूरी करने में जुटे रहे। बताते चलें कि कुंडहित मुख्यालय के अलावा प्रखंड के बनकाठी, बाबूपुर में भी रथ यात्रा का आयोजन किया जाता रहा है। लेकिन इस बार वहां भी काफी सीधे साधे ढंग से रथ यात्रा की परंपराओं का निर्वहन किया गया। बहरहाल पहली बार परंपरा के खिलाफ रथयात्रा का उत्सव मना कर भी नहीं मनाया जा सका।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleनारायणपुर के ग्रामीण क्षेत्र के किसानों ने अच्छी फ़सल की कामना को लेकर किया भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना
    Next Article बढ़ते मच्छरों के प्रकोप से लोग परेशान, विभाग को कीटनाशक दवा छिड़काव करने की है आवश्यकता:गणेश

    Related Posts

    जमशेदपुर में ओलंपिक दिवस: 37 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान

    June 23, 2026

    रांची: जेपीएल फाइनल में भगदड़, JSCA स्टेडियम में कई दर्शक घायल

    June 23, 2026

    झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन पद्म भूषण से सम्मानित

    June 23, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    जमशेदपुर में ओलंपिक दिवस: 37 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान

    रांची: जेपीएल फाइनल में भगदड़, JSCA स्टेडियम में कई दर्शक घायल

    झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन पद्म भूषण से सम्मानित

    भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: SDPO-SHO पर हत्या का केस

    भारतीय ज्ञान-मीमांसा: मिथिला विवि में व्याख्यान

    लखनऊ अग्निकांड में बुलडोजर न्याय: रत्नाकर की सख्त मांग

    सूचना के अधिकार: सरकार के ‘अधूरे फैसले’ पर गलगली के सवाल

    लखनऊ अग्निकांड: कब जागेगा तंत्र, सुधारों की क्यों दरकार?

    लखनऊ में भीषण अग्निकांड: 15 जिंदगियां राख

    कालिकापुर-बागों सड़क की बदहाली से ग्रामीण परेशान, पक्की सड़क निर्माण की उठी मांग

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.