
जमशेदपुर में विजयादशमी के पावन अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हुआ। महिलाओं ने पूजा पंडालों में पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाकर मां को अश्रुपूर्ण विदाई दी। शाम ढलते ही ढोल-ताशों की गूंज और जयकारों के बीच हजारों श्रद्धालु नाचते-गाते विसर्जन घाटों तक पहुंचे, जिससे पूरा शहर भक्तिमय हो उठा।
मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन: प्रमुख घाट और श्रद्धालुओं का सैलाब
प्रशासन द्वारा चिन्हित प्रमुख जलाशयों में मानगो स्वर्णरेखा नदी घाट, डिमना लेक, सोनारी, कदमा और खरकई नदी घाट शामिल हैं। इन सभी घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। मानगो स्वर्णरेखा घाट पर सबसे अधिक चहल-पहल देखी गई, जहां सैकड़ों पूजा समितियों की प्रतिमाएं कतारबद्ध होकर विसर्जन के लिए पहुंचीं। डिमना लेक और सोनारी घाट पर भी सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए थे।
सिंदूर खेला की रस्म के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पंडालों में पारंपरिक बंगाली धुनों पर ढाक की थाप ने वातावरण को ऊर्जावान बनाए रखा। श्रद्धालु जय माता दी के नारे लगाते हुए ट्रकों और ट्रैक्टरों पर सजी प्रतिमाओं के साथ पैदल चल रहे थे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: सिविल डिफेंस और एनडीआरएफ मुस्तैद
किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए थे। सिविल डिफेंस और एनडीआरएफ की टीमें प्रशिक्षित गोताखोरों के साथ सभी प्रमुख घाटों पर तैनात रहीं। नदी के किनारे बैरिकेडिंग की गई थी और गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए लगातार उद्घोषणा की जा रही थी।
सिटी एसपी ललित मीना ने बताया कि मानगो स्वर्णरेखा नदी घाट पर लगभग 250 प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। उन्होंने कहा, “हमारी टीमें हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं। ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है ताकि भगदड़ या डूबने की घटनाओं को रोका जा सके।” समाचार लिखे जाने तक विसर्जन का सिलसिला देर रात तक जारी रहने की संभावना है।
प्रशासनिक सहयोग और सामाजिक सौहार्द की मिसाल
इस महाआयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में दुर्गा पूजा सेंट्रल कमेटी, जुस्को, जेएनएसी और मानगो नगर निगम ने अहम भूमिका निभाई। जुस्को द्वारा घाटों पर प्रकाश व्यवस्था और अस्थायी शौचालयों का निर्माण कराया गया था। वहीं, नगर निगम की टीमें सफाई व्यवस्था में लगी रहीं ताकि विसर्जन के बाद घाटों पर गंदगी न फैले।
यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के अतिरिक्त जवान तैनात किए गए थे। भारी वाहनों का प्रवेश शहर में प्रतिबंधित रहा। इस दौरान सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली जब विभिन्न समुदाय के लोग श्रद्धालुओं के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था करते दिखे।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की भूमिका सराहनीय रही। अधिक जानकारी के लिए आप एनडीआरएफ की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
आस्था का प्रवाह देर रात तक रहेगा जारी
छोटी-बड़ी सभी पूजा समितियां अपनी-अपनी प्रतिमाओं को लेकर घाटों पर पहुंचती रहीं। पुलिस कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार, देर रात तक विसर्जन प्रक्रिया चलने का अनुमान है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शांति और अनुशासन बनाए रखें तथा प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। विजयादशमी का यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और जमशेदपुर ने इसे पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया।

