लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्री कृष्णा सिंह की जयंती के अवसर पर बेगूसराय में भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए नई पीढ़ी को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी गई।
डॉ श्री कृष्णा सिंह के आदर्शों पर चलने का संकल्प
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी बेगूसराय श्री रिची पांडेय पुलिस अधीक्षक बेगूसराय श्री मनीष सहित अन्य पदाधिकारी द्वारा उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा बिहार के विकास, सामाजिक उत्थान और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान का स्मरण किया।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के आदर्शों, जनसेवा के प्रति समर्पण तथा बिहार के सर्वांगीण विकास के लिए उनके प्रयासों को याद किया गया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन सार्वजनिक सेवा, दूरदर्शी नेतृत्व और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता की प्रेरणा देता है। उनके योगदान का स्मरण नई पीढ़ी को राज्य के विकास, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त श्री आकाश चौधरी, नगर आयुक्त श्री सोमेश बहादुर माथुर, अपर समाहर्ता श्री बृज किशोर चौधरी, अपर समाहर्ता (विभागीय जाँच) श्री महेश्वर प्रसाद सिंह, अनुमंडल पदाधिकारी, बेगूसराय श्री अश्विनी कुमार सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। सभी ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
बिहार के निर्माता के रूप में याद किए जाते हैं श्रीबाबू
डॉ श्री कृष्णा सिंह को बिहार का ‘श्रीबाबू’ कहकर सम्मान से पुकारा जाता है। वे 1946 से 1961 तक लगातार बिहार के मुख्यमंत्री रहे और आधुनिक बिहार की नींव रखने में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। उन्होंने जमींदारी उन्मूलन, कोसी बांध परियोजना, भाखड़ा नांगल परियोजना में बिहार की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने जैसे ऐतिहासिक कार्य किए। उनकी प्रशासनिक क्षमता और ईमानदारी आज भी मिसाल है।
श्रीकृष्ण सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1887 को मुंगेर जिले के खनवा गांव में हुआ था। वे पटना विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री लेकर वकालत शुरू की, लेकिन जल्द ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। 1937 में बिहार के प्रथम प्रधानमंत्री (तत्कालीन पदनाम) बने और आजादी के बाद पहले मुख्यमंत्री। उनके नेतृत्व में बिहार ने औद्योगिकरण की दिशा में कदम बढ़ाए। बरौनी रिफाइनरी, सिंदरी खाद कारखाना, बोकारो स्टील प्लांट की आधारशिला उन्हीं के कार्यकाल में पड़ी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने साझा किए संस्मरण
कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी श्री रिची पांडेय ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ श्री कृष्णा सिंह ने प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया था। उन्होंने कहा, “आज हम जिस प्रशासनिक ढांचे में काम कर रहे हैं, उसकी मजबूत नींव श्रीबाबू ने रखी थी। उनका ‘लोकसेवा’ का मंत्र आज भी प्रासंगिक है।” पुलिस अधीक्षक श्री मनीष ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने में उनके योगदान को रेखांकित किया।
उप विकास आयुक्त श्री आकाश चौधरी ने ग्रामीण विकास की योजनाओं में श्रीबाबू की दूरदर्शिता का उल्लेख किया। नगर आयुक्त श्री सोमेश बहादुर माथुर ने शहरी नियोजन में उनके योगदान को याद किया। अपर समाहर्ता श्री बृज किशोर चौधरी और श्री महेश्वर प्रसाद सिंह ने राजस्व प्रशासन में सुधार के उनके प्रयासों को सराहा।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं श्रीबाबू के आदर्श
इस अवसर पर स्कूली बच्चों और एनसीसी कैडेट्स ने भी भाग लिया। जिला प्रशासन की ओर से श्रीकृष्ण सिंह के जीवन पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें उनके दुर्लभ चित्र, पत्र और दस्तावेज प्रदर्शित थे। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को बिहार के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना था। विकिपीडिया पर श्रीकृष्ण सिंह के जीवन के बारे में और पढ़ें।
कार्यक्रम का संचालन जिला जनसंपर्क पदाधिकारी ने किया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। बेगूसराय जिला प्रशासन की यह पहल सराहनीय है, जिससे महापुरुषों के प्रति सम्मान की परंपरा जीवंत रहती है।

