तेहरान. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा कच्चे तेल से लदा एक विशाल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंग की चपेट में आ गया. ईरान का दावा है कि इस जहाज पर 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ था. कथित घटना के बाद टैंकर में विस्फोट हो गया और उसमें आग लग गई. हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी ने पुष्टि नहीं की है.
बिना इजाजत वाले रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था जहाज
ईरान के सरकारी मीडिया संस्थान प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरजीसी ने आरोप लगाया कि टैंकर ऐसे समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जिसे तेहरान की मंजूरी नहीं मिली थी. ईरानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि जहाज ने अपनी वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए पोजिशनिंग और रडार सिस्टम बंद कर दिए थे. इस घटना के बाद ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले अन्य जहाजों को भी चेतावनी दी है. ढ्ढक्रत्रष्ट के मुताबिक, इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को ईरान के नियमों के तहत बंद रखा गया है. संगठन ने चेतावनी दी कि निर्देशों की अनदेखी करने वाले जहाजों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
होर्मुज में बढ़ता तनाव, समुद्री कारोबार पर संकट
होर्मुज में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पहले से अधिक जोखिम भरी हो गई है. अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों और नाकेबंदी के बीच तेहरान ने भी अपनी कार्रवाई तेज की है. वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से होर्मुज बेहद अहम है. संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया के समुद्री रास्तों से होने वाले तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (रुहृत्र) के कुल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता था. ऐसे में यहां लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.
बता दें कि इसी साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से तेहरान ने इस समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है. ईरान समुद्री यातायात को सीमित करके वाशिंगटन पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है.
तेल की कीमतों और अमेरिकी राजनीति पर दबाव बनाने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि तेहरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के खिलाफ नई रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीति का एक उद्देश्य तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखना और अमेरिका के मध्यावधि चुनावों पर प्रभाव डालना है.
इस संकट के दौरान केवल तेल टैंकर ही निशाने पर नहीं रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, मालवाहक और कंटेनर जहाजों को भी हमलों, रोक-टोक और डूबने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा है. इससे समुद्री परिवहन कंपनियों, बीमा क्षेत्र और वैश्विक सप्लाई चेन के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं.
अभी तक नहीं बनी अमेरिका और ईरान के बीच बात
बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थों के जरिए कई बार बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन इस बातचीत का कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया. जिसके चलते होर्मुज को सामान्य आवाजाही के लिए दोबारा खोलने का रास्ता अब तक साफ नहीं हो सका. होर्मुज के बंद होने से दुनियाभर के ऊर्जा बाजारों में तेल की किल्लत हो गई.

