लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जीविका दीदियों का राजनीतिक इस्तेमाल: गंभीर आरोप
पटना। बांकीपुर उपचुनाव को लेकर जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रचार में जीविका दीदियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है और मतदाताओं को सरकारी योजनाओं का लाभ बंद होने का डर दिखाकर एनडीए के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रभावित किया जा रहा है। प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वे चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे।
प्रशांत किशोर ने कहा कि एनडीए के लोग जीविका दीदियों का गलत तरीके से उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं को यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि वे एनडीए के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है और चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
जिलाधिकारी पर भी लगाया आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि पटना के जिलाधिकारी भी सोशल मीडिया के माध्यम से जीविका दीदियों का चुनावी संदर्भ में बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि इस संबंध में उनकी पार्टी दो बार चुनाव आयोग से शिकायत कर चुकी है और अब तीसरी बार भी शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
जन सुराज नेता ने कहा, “यदि 24 घंटे के भीतर जीविका दीदियों को चुनावी प्रक्रिया से अलग नहीं किया गया और प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो हम चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगे।”
कार्यकर्ताओं को परेशान करने का आरोप
प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक स्तर पर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव में हार की आशंका से घबराई हुई है और इसी कारण प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
वहीं, जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने भी प्रशासन और एनडीए पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जीविका दीदियों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है तथा जन सुराज के कार्यकर्ताओं को आधी रात में परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के पोस्टर जबरन हटाए जा रहे हैं और शिकायतों के बावजूद चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मनोज भारती ने कहा, “हम चुनाव आयोग से दो बार मिलकर शिकायत कर चुके हैं। इस बार केवल शिकायत देकर नहीं लौटेंगे। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आयोग के कार्यालय के बाहर धरना देंगे।”
तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया
इस बीच प्रशांत किशोर ने जेजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार है और जनता के मुद्दों के लिए संघर्ष करने वालों का स्वागत होना चाहिए।
हालांकि, प्रशासन और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बांकीपुर उपचुनाव का सियासी समीकरण
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। इस उपचुनाव में जन सुराज ने प्रशांत किशोर को अपना उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। प्रशांत किशोर जो पहले जदयू और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के रणनीतिकार रह चुके हैं, अब अपनी पार्टी जन सुराज के साथ बिहार की राजनीति में नई लकीर खींचने का प्रयास कर रहे हैं। उनके आरोपों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
आरोपों की गंभीरता और संभावित परिणाम
यदि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करता है तो संबंधित अधिकारियों और नेताओं पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हो सकता है। साथ ही जीविका दीदियों को चुनावी प्रक्रिया से तत्काल प्रभाव से अलग करने का आदेश जारी किया जा सकता है। प्रशांत किशोर की धरने की चेतावनी से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। देखना होगा कि अगले 24 घंटे में प्रशासन क्या कदम उठाता है।
पृष्ठभूमि: जीविका कार्यक्रम और चुनावी आचार संहिता
जीविका बिहार सरकार का एक प्रमुख ग्रामीण आजीविका मिशन है जो स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य करता है। इस कार्यक्रम के तहत जुड़ी महिलाओं को जीविका दीदियों के नाम से जाना जाता है। चुनाव आयोग के नियमानुसार, किसी भी सरकारी योजना के लाभार्थियों या कर्मचारियों का राजनीतिक प्रचार में उपयोग करना आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना जाता है। प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए आरोप यदि सही साबित होते हैं तो यह न केवल चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है बल्कि महिला सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकता है।
चुनाव आयोग को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे। अधिक जानकारी के लिए आप भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

